अंग्रेजों द्वारा उन्हें बरेली जेल भेज दिया गया। उन्हें बरेली जेल में गड्ढा बैरक में रखा गया। उसी बैरक में सरोजिनी नायडू, विजय लक्ष्मी पंडित तथा बिठूर की महारानी भी कैद थीं। बरेली जेल में ही भागीरथी देवी ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम सरोजिनी नायडू ने भारत भूषण रखा था।
भारत भूषण बताते हैं कि उनके जन्म के समय उनके पिता तुंगल सिंह फतेहगढ़ जेल में बंद थे। कैदियों की बदली में उन्हें बरेली जेल लाया गया। तब तुंगल सिंह को अपने पुत्र के जन्म की जानकारी हुई थी। जेल में पैदा होने के कारण भारत भूषण को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माना गया। जेल से छूटने के बाद भागीरथी देवी स्वतंत्रता आंदोलन के लिए महिलाओं को जागरूक करती रहीं।
स्वतंत्रता आंदोलन में तुंगल सिंह के पिता भोला सिंह 1941 में चार माह जेल में रहे तथा उन पर सौ रुपये जुर्माना भी लगाया गया। तुंगल सिंह की माता न्यादरी देवी सन 1932 में तीन माह और 1941 में छह माह जेल में रही।
किशन सिंह 1932 में छह माह जेल में रहे और उन पर 50 का जुर्माना भी लगाया गया था। उन्हीं के परिवार के मुरली सिंह, स्वरूपिया देवी भी जेल में रहीं। उदयपुर गांव के मेहरबान सिंह, हरदेव सिंह तथा दीवान सिंह भी स्वतंत्रता आंदोलन में जेल में रहे। तुंगल सिंह की मृत्यु 23 मार्च 2012 को हुई।