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जश्न-ए-आजादी : जब स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में रम गया था बिजनौर का ये पूरा गांव

Sun, 08 Aug 2021 12:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

भारत भूषण बताते हैं कि उनके जन्म के समय उनके पिता तुंगल सिंह फतेहगढ़ जेल में बंद थे। कैदियों की बदली में उन्हें बरेली जेल लाया गया। तब तुंगल सिंह को अपने पुत्र के जन्म की जानकारी हुई थी। जेल में पैदा होने के कारण भारत भूषण को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माना गया।
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स्वतंत्रता सेनानी तुंगल सिंह और उनकी पत्नी भागीरथी देवी। फाइल फोटो - फोटो : BIJNOR
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विस्तार
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बिजनौर के अफजलगढ़ विकास क्षेत्र के ग्राम उदयपुर का स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ा योगदान रहा। इस गांव के 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वतंत्रता आंदोलन में जेल गए। इनमे से आठ एक ही परिवार के थे। न्यादरी देवी ने अपने बेटो को जेल में ही जन्म दिया था। भारत कोकिला सरोजिनी नायडू ने उसका नाम भारत भूषण रखा था।

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ग्राम उदयपुर निवासी भोला सिंह तथा उनकी पत्नी न्यादरी देवी ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। भोला सिंह के भाई किशन सिंह तथा उनके पुत्र तुंगल सिंह भी स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े थे। तुंगल सिंह और उनकी पत्नी भागीरथी देवी ने अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम कर दिया था। एक समय ऐसा आया कि अंग्रेजी हुकूमत ने तुंगल सिंह से परेशान होकर उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने वाले को 50 रुपये नगद इनाम की घोषणा की थी।
 

भारत भूषण।- फोटो : BIJNOR

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तुंगल सिंह ने महसूस किया कि बिना महिलाओं की सहभागिता के स्वतंत्रता आंदोलन गति नहीं पकड़ सकता। उन्होंने अपनी पत्नी भागीरथी देवी को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। भागीरथी देवी से पारंपरिक परिधान न पहन कर सलवार कुर्ता पहनने के लिए कहा, जिससे उन्हें घुड़सवारी सिखाई जा सके। भागीरथी देवी भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गई और घोड़े पर बैठकर गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक करने लगीं।

तुंगल सिंह ने भागीरथी देवी को साइकिल चलानी सिखाई और लाठी, कृपाण चलाने की ट्रेनिंग दी। एक महिला द्वारा खिलाफत की खबर अंग्रेज अधिकारियों तक पहुंची तो उन्होंने भागीरथी देवी को गिरफ्तार कर लिया। जज ने उन्हें छह माह की सजा सुनाई जिस पर भागीरथी देवी ने हंसकर कहा बस छह माह। तब जज ने उन्हें डेढ़ साल की सजा सुनाई।

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अंग्रेजों द्वारा उन्हें बरेली जेल भेज दिया गया। उन्हें बरेली जेल में गड्ढा बैरक में रखा गया। उसी बैरक में सरोजिनी नायडू, विजय लक्ष्मी पंडित तथा बिठूर की महारानी भी कैद थीं। बरेली जेल में ही भागीरथी देवी ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम सरोजिनी नायडू ने भारत भूषण रखा था।

भारत भूषण बताते हैं कि उनके जन्म के समय उनके पिता तुंगल सिंह फतेहगढ़ जेल में बंद थे। कैदियों की बदली में उन्हें बरेली जेल लाया गया। तब तुंगल सिंह को अपने पुत्र के जन्म की जानकारी हुई थी। जेल में पैदा होने के कारण भारत भूषण को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माना गया। जेल से छूटने के बाद भागीरथी देवी स्वतंत्रता आंदोलन के लिए महिलाओं को जागरूक करती रहीं।

स्वतंत्रता आंदोलन में तुंगल सिंह के पिता भोला सिंह 1941 में चार माह जेल में रहे तथा उन पर सौ रुपये जुर्माना भी लगाया गया। तुंगल सिंह की माता न्यादरी देवी सन 1932 में तीन माह और 1941 में छह माह जेल में रही।

किशन सिंह 1932 में छह माह जेल में रहे और उन पर 50 का जुर्माना भी लगाया गया था। उन्हीं के परिवार के मुरली सिंह, स्वरूपिया देवी भी जेल में रहीं। उदयपुर गांव के मेहरबान सिंह, हरदेव सिंह तथा दीवान सिंह भी स्वतंत्रता आंदोलन में जेल में रहे। तुंगल सिंह की मृत्यु 23 मार्च 2012 को हुई।
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