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दर्जनों गांवों पर मंडराया खतरा: जिले में बाढ़ जैसे हालात, लगातार बढ़ रहा गंगा का जलस्तर, सात शहरों में अलर्ट जारी

Tue, 19 Oct 2021 09:42 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर

सार

पहाड़ों पर हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। गंगा के जलस्तर को देखते हुए अधिकारियों ने सात जिलों में अलर्ट जारी किया है। वहीं गांवों के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जाने हालात। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पहाड़ों पर 48 घंटों से हो रही भारी बारिश की वजह से कालागढ़ के रामगंगा बांध का जलस्तर 363.50 मीटर पहुंच गया है। बांध प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के सात जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस अधिकारियों को बाढ़ चेतावनी जारी कर दी है। बांध से पहले चरण में पांच हजार क्यूसेक पानी की निकासी की जाएगी। कालागढ़ के सूखासोत का पानी 48 घंटों की बारिश के बाद उफनकर नई बस्ती के सामने पहुंच गया है। जिससे इस्लामनगर, पुराना कालागढ़ की नई बस्ती के सामने जलभराव हो गया है।

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बताया गया कि मंगलवार सुबह हरिद्वार के भीमगोडा बैराज से छोड़ा गया तीन लाख, 72 हजार क्यूसेक पानी बिजनौर बैराज पर पहुंच गया है। मंगलवार रात में आठ बजे बैराज से 3.61 लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। ऐसे में खादर क्षेत्र में बाढ़ के हालात बन गए हैं और कई गांवों में पानी घुस गया है। बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने रात में 8:30 बजे बताया कि गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। बिजनौर बैराज से तीन लाख 67 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे खादर क्षेत्र में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं। अभी तक शेरपुर नई बस्ती, हसापुर परसा, दबखेडी, हरिपुर आदि  गांवों में पानी पहुंच चुका है। वहीं क्षेत्र के दर्जनों गांवों में देर रात तक पानी पहुंचने की संभावना है। ग्रामीणों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की अपील की जा रही है।

वहीं बांध का जलस्तर बढ़ने के बाद अधिकारियों ने रामगंगा नदी में पानी की निकासी का निर्णय लिया है। बांध के अधीक्षण अभियंता प्रवीण कुमार ने बाढ़ चेतावनी जारी कर दी है। मुरादाबाद, बरेली, कानपुर के आयुक्त व पुलिस महानिरीक्षक के अलावा बिजनौर, मुरादाबाद, जेपीनगर, रामपुर, बरेली, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर के जिला अधिकारियों को बाढ़ चेतावनी जारी कर कहा है कि बांध का जलस्तर 363.50 मीटर होने के पश्चात पानी की निकासी की जाएगी। बांध का अधिकतम जलस्तर 365.300 मीटर है।
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पहाड़ों की बारिश से कालागढ़ के सूखासोत, मीरासोत, चौड़ासोत आदि का पानी रामगंगा नदी में दो दिनों से चल रहा है। जो हरेवली होकर भूतपुरी से गुजर रहा है। अब रामगंगा बांध के स्पिलवे से चलने वाला पानी इसी मार्ग से बिजनौर, मुरादाबाद, जेपीनगर, रामपुर, बरेली, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर आदि से होकर जाएगा। नदी में पहले से ही जमा पानी का स्तर कालागढ़ से आने वाले पानी से और अधिक हो सकता है। जिससे तटीय इलाकों की आबादी व फसलों को नुकसान हो सकता है।


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जून में ही जारी कर दी थी चेतावनी
रामगंगा बांध प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के सात जनपदों बिजनौर, मुरादाबाद, जेपीनगर, रामपुर, बरेली, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर के जिला अधिकारियों को आठ जून को ही चेतावनी दी थी कि रामगंगा नदी के तटीय इलाकों को खाली करा लिया जाए। जिससे जन धन की हानि न हो सके। ईई नीरज कुमार त्यागी ने बताया कि प्रशासन को पानी छोड़ने से पहले ही मंगलवार को लिखित सूचना जारी कर दी गई है। बांध से शीघ्र ही पानी की निकासी की जाएगी। रामगंगा बांध से 1978, 1990, 1998, 2000, 2010 में पानी की निकासी के दौरान भारी बाढ़ का सामना उत्तर प्रदेश के सातों जनपदों को करना पड़ा था।

वहीं गंगा का जलस्तर एकदम बढ़ने से प्रशासन सतर्क हो गया है। तटीय गांववालों को भी चौकस कर दिया गया है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से गेहूं की बुवाई पर असर पड़ेगा।

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दो दिन तक हुई बारिश ने जिले में खेतों को पानी से लबालब भर दिया। उत्तराखंड में भी खूब बारिश हुई। वहां के पहाड़ों का पानी बरसाती नदियों के जरिये गंगा में ही आता है। बारिश का पानी मंगलवार को गंगा में पहुंच गया तो जलस्तर बहुत बढ़ गया। मंगलवार को गंगा में 20 हजार क्यूसेक पानी चल रहा था, जो बुधवार को बढ़कर एक लाख 99 हजार क्यूसेक हो गया। पहाड़ों के बारिश का पानी आने से गंगा उफन गई है। बारिश से तटीय गांव वाले भी चौकस हो गए हैं। तटीय गांव वालों की जमीन गंगा की धारा के दूसरी और गंगा के बीच में भी है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय गांव वालों के आगे चारे की भी समस्या आ जाएगी। मध्य गंगा बैराज के जेई पीयूष बालियान के अनुसार गंगा का जलस्तर बहुत बढ़ गया है, लेकिन इससे अभी कोई नुकसान नहीं है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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