जून में ही जारी कर दी थी चेतावनी
रामगंगा बांध प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के सात जनपदों बिजनौर, मुरादाबाद, जेपीनगर, रामपुर, बरेली, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर के जिला अधिकारियों को आठ जून को ही चेतावनी दी थी कि रामगंगा नदी के तटीय इलाकों को खाली करा लिया जाए। जिससे जन धन की हानि न हो सके। ईई नीरज कुमार त्यागी ने बताया कि प्रशासन को पानी छोड़ने से पहले ही मंगलवार को लिखित सूचना जारी कर दी गई है। बांध से शीघ्र ही पानी की निकासी की जाएगी। रामगंगा बांध से 1978, 1990, 1998, 2000, 2010 में पानी की निकासी के दौरान भारी बाढ़ का सामना उत्तर प्रदेश के सातों जनपदों को करना पड़ा था।
वहीं गंगा का जलस्तर एकदम बढ़ने से प्रशासन सतर्क हो गया है। तटीय गांववालों को भी चौकस कर दिया गया है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से गेहूं की बुवाई पर असर पड़ेगा।
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दो दिन तक हुई बारिश ने जिले में खेतों को पानी से लबालब भर दिया। उत्तराखंड में भी खूब बारिश हुई। वहां के पहाड़ों का पानी बरसाती नदियों के जरिये गंगा में ही आता है। बारिश का पानी मंगलवार को गंगा में पहुंच गया तो जलस्तर बहुत बढ़ गया। मंगलवार को गंगा में 20 हजार क्यूसेक पानी चल रहा था, जो बुधवार को बढ़कर एक लाख 99 हजार क्यूसेक हो गया। पहाड़ों के बारिश का पानी आने से गंगा उफन गई है। बारिश से तटीय गांव वाले भी चौकस हो गए हैं। तटीय गांव वालों की जमीन गंगा की धारा के दूसरी और गंगा के बीच में भी है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय गांव वालों के आगे चारे की भी समस्या आ जाएगी। मध्य गंगा बैराज के जेई पीयूष बालियान के अनुसार गंगा का जलस्तर बहुत बढ़ गया है, लेकिन इससे अभी कोई नुकसान नहीं है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।