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Bijnor News: राजा के डर से राजकुमार ने छोड़ी रियासत, बढ़ गया कुनबा

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बिजनौर में पिंजरे में कैद खूंखार गुलदार फाइल फोटो
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बिजनौर। जंगल में बाघ के साथ रहते हुए, जो गुलदार भोजन और जान बचाने के तरीके तलाशता था, गन्ने के खेतों में शरण मिलते ही सेहतमंद हो गया। अब गुलदार का वजन जहां डेढ़ गुना तक बढ़ गया, वहीं प्रजन्नदर भी बढ़ गई। वन्य जीव विशेषज्ञों ने एक सप्ताह तक जिले में रहकर इस पर सर्वे कर अपनी पूरी रिपोर्ट वन विभाग को सौंप दी है।
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पांच साल पहले तक जिले में गुलदार की मौजूदगी अमानगढ़ के रिजर्व फॉरेस्ट तक सीमित थी। पिछले दस साल में वहां बाघों की संख्या दोगुना होकर 32 तक पहुंची तो गुलदार ने गन्ने के खेतों में शरण ले ली। पिछले दो साल में जहां 23 इंसान गुलदार के हमलों में मारे गए, वहीं करीब 100 लोग घायल हुए। अब वन्य जीव संस्थान से डॉ. हबीब के नेतृत्व में टीम ने जिले में करीब एक सप्ताह रहकर गुलदार पर शोध किया। इसमें पता चला कि जो गुलदार रिजर्व फॉरेस्ट में अपनी जान बचाने और भोजन करने को शिकार तलाशता था, वह अब गन्ने के खेतों में खुद राजा बन गया है। ऐसे में उसके व्यवहार और सेहत दोनों में अंतर आ गया है। पिछले एक साल में जो गुलदार पकड़े गए, उनमें दस से ज्यादा गुलदार 80 किलोग्राम से ऊपर के थे। नगीना में पकड़े गए एक गुलदार का वजन तो 90 किलो से भी ऊपर था। वहीं खेतों में हर माह शावक मिलने से उनकी प्रजनन दर बढ़ने के संकेत भी मिले हैं। वजन बढ़ने के पीछे खेतों में घूम रहे गोवंश और अन्य जीवों का आसानी से शिकार होना माना जा रहा है।

-ट्रिपल टी का दिया फार्मूला, तीन साल तक होगा शोध
वन्य जीव संस्थान की टीम ने अगले तीन साल तक गुलदार पर शोध की जरूरत बताई। फिलहाल ट्रिपल टी, जिसमें ट्रेस, ट्रैक और ट्रैप का फार्मूला अपनाने की सलाह दी है। इसके अलावा कहा कि ग्रामीणों को गुलदार से बचने के लिए जागरूक होना पड़ेगा। इसके लिए वन विभाग को ग्रामीणों तक गुलदार के व्यवहार, उसके हमला करने के तरीकों आदि की जानकारी देने को कहा है।
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-87 गांव हो चुके संवेदनशील घोषित
वन विभाग अब तक जिले के 87 गांवों को गुलदार की मौजूदगी को लेकर संवेदनशील घोषित कर चुका है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में गन्ने के खेतों में 500 से ज्यादा गुलदार हो सकते हैं, क्योंकि पिछले एक साल में ही 48 गुलदार पकड़े जा चुके हैं। इसके बावजूद रोजाना गुलदार के पशुओं पर हमले करने की सूचना आती हैं।
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इनकी बताई जरूरत
-जिले में आसपास रेस्क्यू सेंटर खोलने की जरूरत बताई
-पिंजरों की संख्या बढ़ाकर गुलदार को पकड़ा जाए
-ग्रामीणों को जागरूक कर गुलदार के हमलों को कम करने की सलाह दी
-संवेदनशील गांवों में विशेष अभियान चलाने और गश्त बढ़ाने की बात कही
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वन्य जीव विशेषज्ञों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। हमारी टीम भी संवेदनशील गांवों में लाउडस्पीकर और गश्त के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक कर रही है। अभी तक वन विभाग के पास 60 पिंजरे थे, 100 पिंजरे और बढ़ाने के लिए अन्य विभागों से सहयोग मांगा गया है। वन विभाग अपने संसाधन बढ़ा रहा है ताकि गुलदार पर नियंत्रण पाया जा सके।
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ज्ञान सिंह, डीएफओ बिजनौर


गुलदार के हमले से बचने के लिए करें यह उपाय

- खेतों में दो या उससे अधिक के समूह में जाएं

- गन्ना काटने से पहले जंगल में जाकर हाका लगाएं

-खेत में काम करते समय मोबाइल या रेडियो पर गाने चलाएं

- काम करते समय एक व्यक्ति को निगरानी के लिए लगाएं

- खेतों में काम करते समय सिर पर हेलमेट या नकपैड पहनें

- अधिक रात में खेतों पर न जाएं, खेतों की निगरानी मचान से ही करें
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