काकोरी कांड के नायकों ने गांव पैजनियां में ली थी शरण
बिजनौर। नौ अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी स्टेशन पर सरकारी खजाना लूट कर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दे दी थी। काकोरी कांड में शामिल रहे कई क्रांतिकारियों ने अज्ञातवास की अवधि में बिजनौर के ग्राम पैजनिया में क्रांतिकारी शिवचरण त्यागी जी के यहां शरण ली थी। काकोरी कांड में शामिल रहे क्रांतिकारियों की याद में गांव में एक स्मारक का निर्माण भी कराया गया है।
काकोरी कांड को अंजाम देने के बाद क्रांतिकारी अंग्रेजी हुकूमत के निशाने पर आ गए थे। अंग्रेजी सरकार के पुलिस अधिकारी लगातार दबिश दे रहे थे। ऐसी स्थिति में कानपुर के प्रख्यात राष्ट्रवादी पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के निर्देश पर कई क्रांतिकारी ग्राम पैजनिया पहुंचे थे जहां क्रांतिकारी शिवचरण त्यागी ने उन्हें अपने निवास स्थान में छिपाया था। शिवचरण त्यागी के नवासे भोला नाथ त्यागी बताते हैं कि गणेश शंकर विद्यार्थी के साथ ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खां सबसे पहले ग्राम पैजनिया पहुंचे थे। यह लोग रेलगाड़ी से सिसौना रेलवे स्टेशन पर उतरे थे तथा वहां से पैदल पैजनिया पहुंचे थे। इसके बाद राम प्रसाद बिस्मिल और कई अन्य लोग भी अज्ञातवास में पैजनिया में रहे थे। काकोरी कांड के नायकों की याद में गांव में एक स्मारक का निर्माण कराया गया है। यह भूमि शिवचरण त्यागी के पिता चौधरी गंगा सहाय की थी।
भोलानाथ त्यागी बताते हैं कि स्मारक बनने के बाद कई वर्षों तक बिजनौर प्रशासन द्वारा 19 दिसंबर को कार्यक्रम आयोजित किया जाता था। 19 दिसंबर को ही राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई थी। भोलानाथ बताते हैं कि कई वर्ष से उस स्थान पर कार्यक्रम आयोजित नहीं हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि काकोरी के नायकों की भूमिका को इतिहास में दर्ज किया गया है लेकिन यहां उन्हें भुलाया जा रहा है। ऐसे स्मारकों को सहेज कर रखने की आवश्यकता है। भोलानाथ त्यागी बताते हैं कि काकोरी कांड के अतिरिक्त भी अनेकों क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत की दबिश पड़ने पर ग्राम पैजनिया में शरण ली थी। इनमें महाराष्ट्र के अप्पा राव, बंगाल के अवनीकांत मुखर्जी, पंजाब के राम सिंह और चुन्नीलाल जैसे महान क्रांतिकारी शामिल रहे।
विष्णु शरण दुबलिश का बिजनौर से रहा गहरा नाता
काकोरी कांड में सात साल की सजा काटने वाले मेरठ के मवाना में जन्मे विष्णु शरण दुबलिश का भी बिजनौर से गहरा संबंध रहा। उनकी बिजनौर निवासी हाफिज मोहम्मद इब्राहिम और अब्दुल लतीफ गांधी से गहरी मित्रता थी। उनके कहने पर दुबलिश जी ने अपने भतीजे राजेंद्र दुबलिश का विवाह बिजनौर निवासी गंगाशरण की पुत्री पुष्पा के साथ कराया था। राजेंद्र दुबलिश के विनय चौधरी ने बिजनौर में विष्णु शरण दुबलिश पब्लिक स्कूल शुरू किया। विनय चौधरी बताते हैं कि उनका बचपन दादा दुबलिश जी के सानिध्य में बीता। उन्होंने अपनी पारिवारिक संपत्ति भी छोड़ दी थी। मृत्यु से पहले उन्होंने एक शेर पढ़ा था ।ऽलो अलविदा कहते हैं अब इस जहां को, वापस खुदा के घर से फिर आया न जाएगा।ऽ पकौड़ी के बेहद शौकीन रहे विष्णु शरण दुबलिश को श्रद्धांजलि देने के लिए चंद्रावती, हेमवती नंदन बहुगुणा, मन्मथ नाथ गुप्त जैसे लोग पहुंचे थे।