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मनकुआ की वीरांगनाओं ने पुत्रों को आंदोलन में भेजा

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नींदडू के देवराज सिंह। - फोटो : BIJNOR
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मनकुआं की वीरांगनाओं ने पुत्रों को आंदोलन में भेजा
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नींदडू़। आजादी के लिए संघर्ष करने वाले जनपद बिजनौर के 700 से अधिक आंदोलनकारियों में पुरुषों ने तो अपना लोहा मनवाया ही, महिलाएं भी किसी सूरत पीछे नहीं रहीं। स्वतंत्रता के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने वाली बहादुर महिलाओं में तीन का संबंध तहसील धामपुर में अल्हैपुर ब्लॉक के गांव मनकुआं से है। गांधी जी के विचारों से प्रभावित इन वीरांगनाओं ने न केवल स्वयं आंदोलन में भाग लिया, अपितु अपने पुत्रों को भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
जनपद की गांधीवादी विचारों से प्रभावित पुरुषों के साथ असंख्य महिलाओं ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भाग लिया। कुर्बानी देने वाली ऐसी आदर्श वीरांगनाओं में मनकुआं की तीन महिलाएं अपने पुत्रों के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहीं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, चर्खा संघ के प्रबंधक डॉ. जसवंत सिंह के आग्रह पर 13 अक्तूबर 1929 को विजयदशमी के दिन करीब 11 बजे पूर्वाह्न रेलगाड़ी द्वारा मुरादाबाद से धामपुर पहुंचे। उनके साथ मीराबेन, पुरुषोत्तम दास टंडन, आचार्य जेबी कृपलानी और निजी सचिव प्यारेलाल आदि कई लोग थे। गांधी जी ने केएम इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित किया। सभा में 20 हजार लोग इकट्ठा हुए थे। इनमें पांच हजार महिलाएं थीं। मनकुआ से डॉ. लाखन सिंह अपनी माता हरदेई, किशोर मनोहर सिंह अपनी माता फूलवती देवी एवं प्रवीण सिंह अपनी माता युद्धिया देवी के साथ गांधी जी के विचार सुनने के लिए नौ किलोमीटर का पैदल सफर कर धामपुर पहुंचे थे।
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चूंकि, अंग्रेजी सरकार आजादी के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों के साथ सख्ती से पेश आ रही थी, इसलिए ग्रामीण प्रताड़ना से बचने और आंदोलनकारी गतिविधियों को जारी रखने के लिए अपने घरों से दूर जंगल में छिपे रहते थे। महिलाएं उनके लिए भोजन पानी की व्यवस्था करने के अलावा गांव व क्षेत्र में दिन भर होने वाली गतिविधियों से उन्हें अवगत कराती थीं। अपने पुत्रों एवं अन्य लोगों को आजादी की लड़ाई के लिए लगातार प्रेरित करने वाली इन महिलाओं ने अंग्रेजी शासन का जमकर विरोध किया।
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विदेशी कपड़ों की होली जलाने पर हुई थीं गिरफ्तार
1933 में अंग्रेज पुलिस ने ब्रिटिश शासन का विरोध करने और जिला मुख्यालय पर विदेशी कपड़ों की होली जलाने के आरोप में हरदेई, फूलवती देवी और युद्धिया देवी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इन पर आर्थिक दंड भी लगाया गया। जुर्माना अदा नहीं करने के कारण महिलाओं के घरों की कुर्की की गई। पुलिस घर का सारा सामान, चारपाई, तख्त, किवाड़, चौखटें, छत की लकड़ियां और खेती से संबंधित हल, पाटा, रस्सी, बैल व गाड़ियां तक अपने साथ थाने ले गई। महिलाओं के प्रपौत्र सेवानिवृत्त अध्यापक कीर्ति कुमार, देवराज सिंह और चेतन कुमार बताते हैं कि जेल में कैद इन महिलाओं से साफ-सफाई के अलावा निर्धारित मात्रा में आटा पीसने और खाना बनाने का कार्य कराया जाता था।

नींदडू के चेतन कुमार।- फोटो : BIJNOR

नींदडू के कीर्ति कुमार।- फोटो : BIJNOR

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