बिजनौर में जनहित वेलफेयर सोसायटी के बैनर तले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने झारखंड के तबरेज अंसारी हत्याकांड के विरोध में प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मुस्लिमों ने मोहल्ला चाहशीरी स्थित जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद मोईन के चौराहे तक हाथों में तख्ती लेकर प्रदर्शन करते हुए जुलूस निकाला। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दरोगा रविंद्र सिंह को सौंपा। ज्ञापन में बताया कि तबरेज अंसारी के निकाह को केवल तीन माह हुए थे। चोरी के शक में बहुसंख्यक समाज की भीड़ ने उसे पकड़कर पेड़ से बांध दिया और जबरन जय श्री राम के नारे लगवाए। भीड़ ने तबरेज को 18 घंटे तक पीटा, लेकिन कोई पुलिसकर्मी उसे बचाने नहीं आया। बाद में पुलिस ने उसका उपचार कराने के बजाए जेल भेज दिया। बाद में अस्पताल में तबरेज की मौत हो गई। मामले में तबरेज अंसारी को मारने वाले गांव वालों को जेल भेजने, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने, जेल अधीक्षक व जेल चिकित्सक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने, मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए कड़ा कानून बनाने की मांग की गई। इस दौरान राष्ट्रीय प्रवक्ता अनवारूल हक, मोहम्मद मोहसिन, नदीम अहमद, महताब, नवाब गजाली, मोहम्मद समीर, नसीमुद्दीन, कारी हन्नान, जुबैर खान आदि मौजूद रहे।
मुस्लिमों ने सीओ को सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
अफजलगढ़। मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज के बाद जामा मस्जिद पर एकत्र हुए। वहां से जुलूस की शक्ल में सब्जी मंडी बस स्टैंड होते हुए कोतवाली पहुंचे और सीओ को राष्ट्रपति से संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया कि भारत में गोरक्षा और श्रीराम के नाम पर मुस्लिमों को जिस तरह से भीड़ पीट पीटकर हत्या कर रही है, उससे पूरे मुस्लिमों में रोष है। दादरी के अखलाक से आरंभ हुए मौत के इस तांडव ने झारखंड के तबरेज अंसारी को अपनी चपेट में ले लिया। तबरेज अंसारी को भीड़ ने मारने के बाद पुलिस के हवाले किया। तब वह सही था, परंतु पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई। अल्पसंख्यकों के खिलाफ बन रहे इस माहौल से मुसलमान भयभीत हैं। राष्ट्रपति स्वयं संज्ञान लेकर समस्त राजनैतिक पार्टियों की लोकसभा व राज्यसभा में बैठक बुलाकर ऐसा कानून पारित करें, ताकि कोई भीड़ किसी भी व्यक्ति को मारे और वह व्यक्ति मर जाए तो भीड़ में शामिल हर शख्स पर सख्त कार्रवाई हो। जिस क्षेत्र में इस तरह की घटना हो, वहां के पुलिस प्रभारी व दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों को बराबर का मुजरिम समझते हुए उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाए।