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सजा-ए-मौत: फांसी की सजा मुकरर्र होते ही कॉपी पर हस्ताक्षर करते हुए कांप गए रैय्यान के हाथ

Sun, 22 May 2022 01:12 AM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
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आरोपी मुनीर बीच में व रैय्यान दाएं - फोटो : amar ujala
बिजनौर में दोहरे हत्याकांड में कोर्ट सजा-ए मौत की सजा सुना चुकी थी, फांसी के आदेश की कॉपी हस्ताक्षर करने के लिए मुनीर और रैय्यान को दी गई। रैय्यान ने पूछा, क्या सजा हुई। फांसी की सजा सुनते ही रैय्यान खामोश हो गया। आदेश की कॉपी की प्रतिलिपि प्राप्त कराने के लिए हस्ताक्षर कराए गए जिस पर रैय्यान के हाथ लड़खड़ा गए।

मुश्किल से रैय्यान ने हस्ताक्षर किए। वहीं मुनीर पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा, वह केवल खामोश रहा और चेहरे पर कुछ तनाव दिखाई दिया। सजा सुनाए जाने के बाद मुनीर को सोनभद्र की जेल भेज दिया गया, वहीं से उसे कोर्ट लाया गया था। बता दें कि मुनीर और रैय्यान सजा क्या हुई है, यह मालूम होने से पहले तक दोनों मुस्करा रहे थे। इस दोहरे हत्याकांड में शामिल होने के अलावा रैय्यान पर कोई अन्य मामले का केस नहीं है।

तंजील हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाले कुख्यात गैंगस्टर मुनीर के खिलाफ 33 मुकदमेे दर्ज है। 15 मुकदमे सिर्फ अलीगढ़ में ही दर्ज हैं जबकि आठ केस बिजनौर में दर्ज हुए हैं। बाकी दिल्ली और अन्य जगहों पर भी मुकदमे पंजीकृत हैं।
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रैय्यान - फोटो : amar ujala
तंजील अहमद और उनकी पत्नी के हत्याकांड में मुनीर और रैय्यान को फांसी की सजा सुनाई गई है। फांसी के साथ साथ एक एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है। अदालत ने अपने आदेश में लिखा है कि मुनीर और रैय्यान को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु ना हो जाए। उच्च न्यायालय इलाहाबाद को फांसी की सजा की पुष्टि करने के लिए पत्र भेजा जाए।

 
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आरोपी मुनीर को लेकर जाती पुलिस - फोटो : amar ujala
अधिवक्ताओं ने किया फांसी की सजा का स्वागत
बिजनौर। मुनीर और रैय्यान को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं डीजीसी वरुण राजपूत, एडीजीसी आनंद जंघाला, एडीजीसी अजीत पंवार, एडीजीसी प्रमोद शर्मा, एडीजीसी मुकुल राठौड़ व क्षितिज अग्रवाल और वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र चौधरी ने फांसी की सजा के फैसले को न्याय की जीत बताया। उनका कहना है कि इससे समाज में अच्छा संदेश जाएगा। और लोग अपराध करने से पहले सोचेंगे।

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बिजनौर पुलिस - फोटो : amar ujala
पुलिस के रिकाॅर्ड की मानें तो मुनीर के खिलाफ पहला मुकदमा साल 2013 में अलीगढ़ के सिविल लाइन थाना में दर्ज हुआ था। इसके बाद दिल्ली के जामिया नगर में लूट का मुकदमा भी साल 2013 में ही लिखा गया। इसी साल अलीगढ़ में दो और मुकदमे हुए। साल 2014 में दस मुकदमे मुनीर के खिलाफ अलीगढ़ और दिल्ली में दर्ज हुए। दिल्ली के जाफराबाद में साल 2014 में ही लूट और हत्या का केस हुआ। दिल्ली के रुपनगर थाने में भी इसी साल एक और हत्या का केस मुनीर के खिलाफ लिखा गया। दिल्ली के बाद अलीगढ़ में भी साल 2014 में हत्या का केस दर्ज हुआ। लखनऊ में भी एक हत्या समेत दो केस मुनीर के खिलाफ दर्ज हैं।

 
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मुनीर - फोटो : amar ujala
मुनीर के प्रमुख अपराध...
- धामपुर में कैशवैन के गार्ड को गोली मारकर 91 लाख की लूट
- दिल्ली के रुपनगर में कैशवैन गार्ड की हत्या कर डेढ़ करोड़ की लूट
- दिल्ली के जाफराबाद में सिपाही धर्मपाल की हत्या कर पिस्टल लूट
- अलीगढ़ के सिविल लाइन में 31 लाख की लूट
- अलीगढ़ में रेलवे मजिस्ट्रेट की सुरक्षा में तैनात सिपाही सुरेश की हत्या कर पिस्टल लूट
- लखनऊ के गोमतीनगर में जज की सुरक्षा में तैनात सिपाही प्रमोद की हत्या कर पिस्टल लूट
- लखनऊ के विभूति खंड में हत्या कर मोटरसाइकिल लूट
- बिजनौर में एनआईए के डीएसपी की पत्नी सहित हत्या
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