बिजनौर। नजीबाबाद निवासी रश्मि अग्रवाल हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रही है। वह पिछले 15 वर्षों से अपनी लेखनी के माध्यम से हिंदी को बढ़ावा देने का काम कर रही है। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है तथा उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
पांच जनवरी 1952 को नहटौर में जन्मी रश्मि अग्रवाल का विवाह नजीबाबाद में हुआ। वह पिछले 50 वर्षों से साहित्य सृजन कर रही हैं। वह कविता, कहानी, आलेख, वार्ता, गीत, स्तंभ सहित कई विधाओं में लेखन कार्य कर रही हैं। उनकी दर्जनभर पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। रश्मि अग्रवाल की रचनाएं देशभर के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। रश्मि अग्रवाल बताती है कि उनका प्रयास जन-जन को हिंदी से जोड़ने का है। इसके लिए उन्होंने वाणी अखिल भारतीय हिंदी संस्थान की स्थापना की है। इसके माध्यम से वह नवोदित लेखकों की रचनाएं संकलित कर पुस्तक के रूप प्रकाशित करती हैं। इससे लिखने वालों का हौसला बढ़ता है। उनकी अब तक दर्जनभर पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कहावतों की रोचक कहानियां, पर्यावरण कितने जागरूक हैं। हम, योग साधना और स्वास्थ्य, इंद्रधनुषी कहानियां, पर्यावरण प्रश्न और भी हैं, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, रश्मि की बाल कहानियां आदि प्रमुख हैं। उनकी पुस्तक पर्यावरण कितने जागरूक हैं हम के लिए उन्हें 2015 में राजभाषा गौरव सम्मान मिल चुका है। यह सम्मान उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा प्रदान किया गया था।
इसके अतिरिक्त उन्हें अमर उजाला एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नारी सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें नेपाल में भारत मैत्री वीरांगना फाउंडेशन काठमांडू द्वारा लेखन प्रतिभा सम्मान दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त भारत श्री सम्मान, संस्कार सारथी सम्मान सहित उन्हें 50 से अधिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। रश्मि अग्रवाल बताती हैं कि 2000 में उन्हें पैरों में समस्या हो गई थी, जिसके बाद उन्हें चार वर्षों तक व्हीलचेयर पर रहना पड़ा। उन्होंने साहस नहीं छोड़ा और खूब लेखन किया। हिंदी साहित्य के अतिरिक्त उन्होंने पर्यावरण पर भी काफी रचनाएं लिखी है। वह वर्तमान में भी अपनी लेखनी के माध्यम से साहित्य की सेवा कर रही है।