मंडावर के गांव डेवलगढ़ के पास खुला पड़ा पीपे के पुल का समान।
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर में किसानों को राहत देने के लिए गंगा पर बनाया गया पीपे के पुल पर फिर से आवागमन शुरू कराया जाएगा। बरसात में बाढ़ की आशंका को देखते हुए पीपे के पुल को खोल लिया जाता है। अब 15 अक्तूबर से पीपे के पुल को फिर से बांधना शुरू किया जाएगा।
खादर क्षेत्र में गंगा किनारे दो दर्जन से अधिक गांव बसे हुए हैं। गंगा के लगातार आबादी की ओर कटान करने की वजह से इन किसानों की जमीन गंगा की धारा के दूसरी ओर पहुंच गए हैं। इन किसानों को खेतों में जाने के लिए गंगा की उफनती हुई लहरों को पार करना पड़ता है। किसान दो साल पहले तक जोड़े वाली नाव से खेतों से ट्रैक्टर ट्राली में गन्ना लेकर आते थे। किसान इस दौरान हादसों का भी शिकार हो जाते थे।
किसानों के आंदोलन के बाद सरकार ने गंगा पर गांव डैबलगढ़ के सामने करोड़ों रुपयों की लागत से पीपे का पुल पिछले साल बनवाया था। इस पुल के बनने से किसानों को बहुत फायदा हुआ। किसान अब नाव आदि के बजाय इस पुल से ही आते जाते हैं। पिछले साल पीपे का पुल बनने के बाद से अब तक कोई हादसा नहीं हुआ है। पीपे के पुल को बाढ़ से नुकसान होने का खतरा रहता है।
बिजनौर में बरसात का समय 15 जून से 15 अक्तूबर तक माना जाता है। अब बरसात का समय निकल चुका है और गंगा का जलस्तर भी सामान्य चल रहा है। लोक निर्माण विभाग अब जल्दी ही पुल को फिर से बांधने की तैयारी कर रहा है। 15 अक्तूबर के आसपास पुल को फिर से बांधने की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। गन्ना पेराई सत्र शुरू होने वाला है। इसी महीने के आखिरी सप्ताह में चीनी मिल गन्ने की पेराई शुरू कर सकती हैं। पुल की मरम्मत आदि काम समय से होने पर किसानों को बहुत राहत मिलेगी।
जल्दी शुरू होगा पुल
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन सुनील सागर के अनुसार पीपे के पुल को जल्दी ही शुरू कराया जाएगा। बरसात में पीपे के पुल को हटाना ही पड़ता है।