सेहत से खिलवाड़ पर चलेगा डोम-24 का चाबुक
बिजनौर। प्रयुक्त खाद्य तेल का बार-बार इस्तेमाल किया जाना सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसके बावजूद होटल, रेस्टोरेंट संचालक और दुकानदार एक ही तेल का कई-कई बार इस्तेमाल कर उसे जहरीला बना रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा करने के लिए शासन ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग डोम-24 नामक विशेष यंत्र दिया है। इसकी मदद से खौलते तेल में भी हानिकारक एसिड की मात्रा का पता लगाया जा सकता है।
डोम-24 से की गई जांच में हानिकारक तत्व पाए जाने की स्थिति में दुकानदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला मुख्यालय से लेकर छोटे से गांवों तक में सड़क, गली, मोहल्लों या फिर कॉलोनियों में इस तरह की दुकानें होती हैं, जहां पर दिन भर भीड़ लगी देखी जा सकती है। आजकल इस तरह का खानपान कई बीमारियों को दावत भी दे रहा है। अधिकांश छोटे-बड़े रेस्टोरेंट या अन्य चाट-पकौड़ी की दुकानों अथवा ठेलों पर कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में एक ही तेल को बार-बार गर्म करके तैयार किया जाता है, जो सेहत के लिए खतरनाक होता है। चिकित्सकों के अनुसार बार-बार गर्म किया गया तेल शरीर के लिए बेहद खतरनाक भी साबित हो सकता है।
तुरंत पता चलेगा तेल शुद्ध है या अशुद्ध
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को तेल की शुद्धता मापने वाला यंत्र डोम-24 उपलब्ध कराया है। इसकी मदद से खाद्य विभाग की टीम मिलावटखोरों को आसानी से मौके पर ही पकड़ सकेगी। अभी तक विभाग के पास ऐसा कोई यंत्र नहीं था। नमूना लेने के बाद लैब में जांच के लिए भेजा जाता था, जिसमें रिपोर्ट आने में काफी वक्त लग जाता था। मगर अब डोम-24 से तुरंत यह पता लग सकेगा कि तेल की शुद्धता कितनी है। किडनी, लीवर, कैंसर जैसी घातक बीमारियाें का खतरा इस तरह के तेल में बने पकवान से हो सकता है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया का भी मानना है कि रिहीटिंग वेजिटेबल ऑयल से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो होती है।
बार-बार गर्म करने पर तेल में बनता है ट्रांस फैटी एसिड
जिला अस्पताल के जनरल फिजिशियन डॉ. राधेश्याम वर्मा ने बताया कि किसी भी खाद्य तेल को तीन से अधिक बार गर्म करने पर उसमें ट्रांस फैटी एसिड बनना शुरू हो जाता है। टोटल पोलर कंपाउंट (टीपीसी) के रूप में जाना जाने वाला यह एसिड तेल को हर बार गर्म करने पर पांच से दस प्रतिशत बढ़ता जाता है। इसके कारण पौष्टिकता और फिजिकोकेमिकल गुण खत्म हो जाते हैं। ब्लैक और स्मोक्ड ऑयल में पकाए गए खाद्य पदार्थों के लगातार खाने से किडनी, लिवर, कैंसर और अल्जाइमर आदि की समस्याएं हो सकती हैं।
एफएसएसएआई की ओर से खाद्य तेल की जांच करने के लिए डोम-24 उपलब्ध कराया गया है। इसके माध्यम से प्रयोग किए जाने वाले खाद्य तेल की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। कुछ स्थानों पर इसका प्रयोग किया गया तो कहीं-कहीं एसिड की मात्रा ज्यादा पाई गई है। ऐसे दुकानदारों को तेल को बार-बार उपयोग न करने की हिदायत देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी गई है - पंकज कुमार, जिला अभिहित अधिकारी बिजनौर।