अब बिजनौर और कालागढ़ में होगी टाइगर सफारी
कालागढ़ (बिजनौर)। जल्द ही जनपद बिजनौर, कालागढ़ व जिम कार्बेट नेशनल पार्क का कद बढ़ने वाला है। क्योंकि यहां अब टाइगर सफारी विकसित होगी। इसके लिए कालागढ़ पाखरो मार्ग पर एक झील और वन्यजीवों के दीदार के लिए चौड़ विकसित किया जा रहा है। जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व अभी तक केवल एक जैविक व वनस्पति विज्ञान की खुली प्रयोगशाला के रूप में ही जाना जाता रहा है। यहां केवल पर्यटकों को ढिकाला, बिजरानी, झिरना व ढेला में वनों में भ्रमण के लिए ही जाने का अवसर मिलता था।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2019 में कालागढ़ के वनों में कदम पड़ने के साथ ही कार्बेट टाइगर रिजर्व के विकसित होने की उम्मीद जगी थी। यहां वनों में अब पर्यटकों को टाइगर सफारी का मौका भी मिलेगा। 106 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बाघों के विचरण के लिए दो बाड़े तैयार किए जा रहे हैं। इन बाड़ों को तार बाड़ से बंद किया गया है। इनमें अंदर रास्ते बनाकर बंद वाहन में पर्यटकों को बाघ का दीदार हो सकेगा। इसके लिए पर्यटकों को बिजनौर, नगीना, बढ़ापुर, पाखरो से और कालागढ़ से पाखरो गेट से टाइगर सफारी का मौका मिलेगा। जिसकी वजह से देश विदेश के पर्यटन मानचित्र पर बिजनौर और कालागढ़ के नाम अंकित हो सकेंगे। यह पहली बार होगा, इसके प्रवेश के लिए आनलाइन बुकिंग की जा सकेगी।
ख़ास क्षेत्र है कालागढ़ पाखरो मार्ग
कालागढ़ पाखरो मार्ग ऐतिहासिक अहमियत वाला क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में खास वीवीआईपी को ही ले जाया जाता रहा है। स्वीडन के राजा रानी इस मार्ग पर भ्रमण कर चुके हैं। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मार्ग पर नहीं जा सके थे। प्रोटोकॉल के चलते वह रामगंगा बांध से ढिकाला गए। गढ़वाल को कुमायूं से जोड़ने वाले मार्ग पर सिद्धबली मंदिर, बाबा कालू सैय्यद का मजार, कालागढ़ में स्टील ब्रिज पर प्राचीन शिव मंदिर, धारा में नूनगढ़ का मंदिर इस मार्ग के धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं। यह स्थान श्रृद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं।
विधिवत किया जा रहा टाइगर सफारी का निर्माण
कालागढ़ के डीएफओ किशन चंद का कहना है कि सिंतबर 2019 में टाइगर सफारी का अनुमोदन किया गया था। भारत सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आदेशों पर वन भूमि का हस्तांतरण किया गया। राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण व अन्य संस्थाओं से अनुमति मिलने पर काम शुरू किया गया। उत्तराखंड शासन ने 2020 में इसकी अनुमति दे दी थी।
प्रकृति के खूबसूरत नजारे भी देखेंगे पर्यटक
टाइगर सफारी के अलावा पाखरो कालागढ़ मार्ग पर पर्यटक प्रकृति के सुंदर नजारे भी देख सकेंगे। इसके लिए नर्सरी चौकी के सामने एक झील व चौड़ का निर्माण किया जा रहा है। जिनमें पर्यटकों को वन्यजीवों की अठखेलियां देखने को मिलेंगी। डीएफओ किशनचंद का कहना है कि कालागढ़ पाखरो मार्ग पर जलभराव से बचाव के लिए बजरी डालकर दो से पांच मीटर तक के पांच कलवर्ट बनाए गए हैं। दो अभी और बनाए जाने हैं। सुरक्षा के लिए वन चौकी, एंटीपोचिंग चौकी व कर्मियों के लिए आवासीय भवन बनाए जाने हैं। बांसों को बोया जा रहा है। हाथी से खेतों को बचाने के लिए हाथी रोधी दीवार कालागढ़ से पाखरो व गूजरसोत तक बनाई जा रही है।
राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की टीम ने किया दौरा
कालागढ़। राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की टीम ने कालागढ़ क्षेत्र का दौरा कर वनों में कराए जा रहे कार्यों का जायजा लिया और कालागढ़ से पाखरों मार्ग पर हो रहे कार्यों की जांच की।
बाघों के संरक्षण के टाइगर रिजर्व के वनों में किए जाने वाले कार्यों को बिना राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की अनुमति के नहीं कराया जा सकता। वनों में पर्यटन के लिए भी एक निर्धारित मापदंड है। पर्यटकों के लिए अधिक क्षेत्र नहीं खोला जा सकता है। इन दिनों कालागढ़ टाइगर रिजर्व के वनों में टाइगर सफारी के अनेक कार्यों का निर्माण किया जा रहा है, जिसे लेकर वन विभाग से जुड़े एनजीओ भी वनों पर अपनी निगाह लगाए हैं। पेड़ों के कटान किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर एनटीसीए की यह टीम कालागढ़ पहुंची। कालागढ़ के वनविश्रामगृह से यह तीन सदस्यों की टीम पाखरों तक पहुंची और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। डीएफओ किशन चंद ने बताया कि टीम ने टाइगर सफारी ने संबधित पत्रावली व धरातल पर चल रहे कार्यों को देखा व जानकारी तलब की गई। टीम में राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण के अधिकारी सेवानिवृत्त प्रमुख वन संरक्षक शैलेंद्र प्रसाद, आरके सिंह व एआईजी मौजूद रहे।