तीन दिवसीय सालाना उर्स में हुआ मुशायरा
संवाद न्यूज एजेंसी
हल्दौर। गांव अम्हेड़ा में दरगाह हजरत बाबा फ़तेह अली शाह और हजरत बाबा चटनी शाह की दरगाह पर लगने वाले तीन दिवसीय सालाना (115 वें) उर्स मुबारक के दूसरे दिन मंगलवार शाम ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया।
मुशायरे में मोहम्मद उस्मान मुख़्तार नदवी ने फ़ीता काटकर शुभारंभ किया। हाजी इरफ़ान साहब ने शमा रोशन की। नाजिमे मुशायरा इरशाद धामपुरी ने हमदे बारी-ए-तआला से मुशायरे का आग़ाज किया। रोशन अब्बास ने ‘दिल की धड़कन ने ये एहसास दिलाया है मुझे, उसने फिर याद किया उसने बुलाया है मुझे’ गजल सुनाई। नवेद अनवर ने सुनाया, ‘बादल भी शायद अबकी बरस मेहरबान थे, बारिश वहां हुई जहां कच्चे मकान थे’। हाशिम रजा ने सुनाया, ‘बेक़द्र हैं वो फूल जो जाने चमन ना हो, इंसां वो क्या है जिस में कोई फ़िक्र-ओ-फ़न ना हो’। शाही वास्ती ने सुनाया, ‘मैंने क्या ख़ूब मोहब्बत की सजा पाई है, मैं तमाशा हूं जमाना ये तमाशाई है’। अंसार तन्हा ने त़माम दिन की थकन यूं उतार लेता हूँ, मैं मां के पहलू में दो पल गुजार लेता हूं’ गजल सुनाई। रफ़ी बढ़ापुरी, अफ़रोज टांटवी, इम्तियाज अजहर, अबरार हमदम,फ़राज बिजनौरी, जिगर धानवी, ख़ालिद गौहर, ख़ुशबू रामपुरी, जफ़र कानपुरी, डॉ. सरीता जैन आदि ने भी कलाम पेश किए।