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फतेहपुर में गंगा की लहरों से कटान तेज

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मंडावर क्षेत्र में हो रहे कटान को देखते प्रशासनिक अधिकारी। - फोटो : BIJNOR
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फतेहपुर में गंगा की लहरों से कटान तेज
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बिजनौर/ंडावर। आठ साल बाद गंगा ने गांव फतेहपुर को फिर से अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। गंगा की धारा में दो झोपड़ी बह भी गई हैं। कटान रोकने के लिए किया जा रहा कार्य भी गंगा की तेज लहरों के सामने टिक नहीं पा रहा है। गांव का प्राथमिक विद्यालय के भी गंगा की चपेट में आने की आशंका है। प्रशासन ने भी गांव वालों से सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कह दिया है। प्रशासन स्टड बनवाकर गांव को बचाने के प्रयास में जुटा है।
गंगा की धारा कुछ दिन पहले तक गांव फतेहपुर से दूर बहती थी, लेकिन अचानक से गंगा की धारा का सारा दबाव गांव की ओर ही हो गया। गंगा तेजी से कटान करते हुए गांव की ओर आ गई। शुक्रवार को गंगा ने गांव की मुख्य सड़क को भी काट दिया। गंगा के कटान को रोकने के लिए पांच दिन पहले काम शुरू करा दिया गया था, लेकिन लगाई गईं बल्लियां भी बह गईं। गांव के रामकिशन और प्रभाकर की झोपड़ी भी गंगा की लहरों में समा गई हैं। गांव वाले घरों का सामान वाहनों में लादकर जाने लगे हैं।
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गांव वालों ने बताया कि पहले गांव में 96 परिवार रहते थे। साल 2013 में उत्तराखंड में आई जल प्रलय से गांव में तबाही आ गई थी। कई मकान गंगा में बह गए थे। तब 61 परिवार गांव से विस्थापित हो गए थे। उन्हें गांव भोजपुर के पास बसाया गया था। अब 35 परिवार किसी तरह गांव में रहकर गुजर बसर कर रहे थे। गांव के अस्तित्व पर संकट आने से वे भी अब पलायन की तैयारी कर रहे हैं। शुक्रवार को ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट विक्रमादित्य सिंह मलिक, तहसीलदार प्रीति सिंह, एक्सईएन राकेश कुमार, एसडीओ धनंजय कुमार मौके पर पहुंचे और जायजा लिया। उन्होंने गांव वालों से सुरक्षित स्थान पर जाने और गंगा के पास न आने के लिए एनाउंसमेंट भी किया।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन राकेश कुमार ने बताया कि एकदम से गंगा की धारा गांव की ओर शिफ्ट होने से कटान हुआ है। कटान को रोकने के लिए तेजी से काम कराया जा रहा है। रात में भी काम कराया जाएगा। हर पल कटान की निगरानी की जा रही है।
बिजनौर और चांदपुर में गंगा सबसे ज्यादा मचाती है तबाही
जिले में गंगा सबसे ज्यादा बिजनौर और चांदपुर में ही तबाही मचाती थी। हर साल जून में या मानसूनी बारिश के दौरान लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ता है। इस बार भी नांगलसोती, रावली, ब्रह्मपुरी, जलीलपुर क्षेत्र के कई गांवों तक गंगा का पानी पहुंच गया था। जलस्तर घटा तो गंगा ने आबादी और खेतों में कटान शुरू कर दिया है। करीब सात साल पहले जून में ही जिले दो गांव सीमलाकलां और फतेहपुर सभाचंद गंगा में समा गए थे।
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अब तक इन गांवों का मिट चुका अस्तित्व
साल 1957 में चांदपुर तहसील का गांव नांदनौर गंगा में बह गया था। इस गांव को खानपुर में आबाद किया गया था। इसके बाद चांदपुर तहसील के गांव जाफराबाद और जहांगीरपुर गांव भी गंगा में जलसमाधि ले चुके थे। इसके बाद वर्ष 1964 में आई गंगा की बाढ़ में विदुरकुटी के सामने आबाद गांव भुआ, बेला, शेरपुर, लीलावली, हरिपुर, श्रीजीपुर, गांवड़ी, खेड़ा, धूधली खादर गंगा में डूब गए थे। पिछले दो दशकों की बात करें तो बिजनौर तहसील के ही गांव मतवाली, सौपुरी, भगवतीपुर, इच्छावाला, मुर्शदाबाद, मोहनपुर भी गंगा की तेज धारा में बह गए। भगवतीपुर, इच्छावाला, मुर्शदाबाद आदि आधा दर्जन गांव धारा के उस पार चले गए और अब गैर आबाद हैं। साल 2001 में भी जनपद का गांव सुक्खापुर भी पानी में बह गया। तत्कालीन डीएम ने सुक्खापुर के ग्रामीणों को नए स्थान पर बसाया, तो ग्रामीणों ने गांव का नाम भी डीएम के नाम पर ‘माकेंडपुरम’ रखा था।

मंडावर के गांव फतेहपुर सभा चंद के सामने कटान करती गंगा।- फोटो : BIJNOR

मंडावर के गांव फतेहपुर सभा चंद के सामने गंगा से हो रहे कटान के डर से सामान भरकर सुरक्षित स्थानों प?- फोटो : BIJNOR

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