बंद रहे कारखाने तो दो डिग्री घट गया जिले का तापमान
अजीत चौधरी
बिजनौर। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया तो सोशल मीडिया पर मैसेज आये कि इससे ग्लोबल वार्मिंग कम होगी। ग्लोबल वार्मिंग का तो पता नहीं, लेकिन इससे बिजनौर के तापमान पर बहुत असर पड़ा है। 41 डिग्री से अधिक रहने वाला तापमान इस बार 39 डिग्री से भी कम रहा। यह भी तब हुआ जब जिले में बारिश सामान्य से दस दिन देर से हुई थी। इसके पीछे लॉकडाउन में फैक्टरियों और वाहनों के बंद रहने को बड़ी वजह बताया जा रहा है।
बिजनौर जिला नदियों से घिरा हुआ है और यहां पर वन्य संपदा की भी कोई कमी नहीं है। इतना सब होने के बाद भी यहां गर्मी पूरा सितम ढाती है। जिले में मई, जून और जुलाई में तापमान 40-41 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता है। तापमान अधिक रहने की एक बड़ी वजह एसी, वाहनों और फैक्टरियों से निकलने वाली गर्मी भी है। तीन महीने तक गर्मी जिलेवासियों की पूरी परीक्षा लेती है, लेकिन कोरोना के बाद उपजी परिस्थितियों से काफी कुछ बदला है। कोरोना की वजह से पिछले साल करीब तीन महीने तक लॉकडाउन रहा और इस बार भी करीब दो महीने लोग घरों में कैद रहे। इसके बाद भी काफी समय पाबंदियों में ही कटा। फैक्टरियां बंद रहीं। इसका असर तापमान पर पड़ा है। जिले में पहले जहां झुलसा देने वाली गर्मी होती थी वहीं इस बार गर्मी कम हुई। वह भी तब जब मई, जून बारिश नहीं हुई और आधा जुलाई भी सूखा ही गुजरा। पहले जहां जिले का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता था वहीं इस बार तापमान 39 डिग्री सेल्सियस भी नहीं पहुंचा।
सात साल के सबसे गर्म दिन
9-6-2015- 41.4 डिग्री सेल्सियस
14-5-2016- 41.6 डिग्री सेल्सियस
5-6-2017- 41.6 डिग्री सेल्सियस
26-7-2018- 40.8 डिग्री सेल्सियस
1-6-2019- 40.8 डिग्री सेल्सियस
26-5-2020- 40.2 डिग्री सेल्सियस
16-5-2021- 38.6 डिग्री सेल्सियस
नोट:तापमान के आंकड़े नगीना स्थित मौसम वेधशाला से लिए गए हैं।
एसी बंद रहने पर बढ़ी ठंडक
प्रतिष्ठानों, स्कूल, कॉलेज, दफ्तरों आदि में अप्रैल से ही ऐसी चलनी शुरू हो जाती हैं। कोरोना की वजह से ये जहां काफी समय तक बंद रहे तो बाद में भी बीमारी के डर से लोगों ने ऐसी कम ही चलाए। काफी उद्योग भी लंबे समय तक बंद रहे। कोरोना काल में लोगों ने प्रकृति के महत्व को भी समझा है। अब पहले से ज्यादा लोग बागवानी कर रहे हैं। जिले में पौधरोपण भी हर साल बड़े स्तर पर होता है। इससे भी गर्मी कम होती है।
पेड़ कुदरती तौर पर लाते हैं ठंडक
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार पेड़ पौधों से प्रकृति को कुदरती तौर पर ठंडा रखा जा सकता है। जिले में काफी पौधे लगाए जा रहे हैं जनता खुद भी जागरूक हो रही है। ओम धारा नर्सरी के मालिक आदित्यवीर सिंह के अनुसार पहले के मुकाबले अब ज्यादा ग्राहक पौधे लेने के लिए आ रहे हैं। पहले केवल बरसात में ही पौधे लगाए जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। नगीना स्थित मौसम वेधशाला के प्रभारी प्रेक्षक सतीश कुमार के अनुसार जिले में इस बार गर्मी कम हुई है। सितंबर में ही मौसम अच्छा हो गया है।