पिता से विरासत में मिली हिंदी को बेटियों तक पहुंचाया
बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा हिंदी साहित्य से भी लगातार जुड़े रहे हैं। पिता से मिले हिंदी संस्कारों को न केवल कविताओं के माध्यम से न केवल संजोया, बल्कि अगली पीढ़ी को भी दिया। उनकी बेटियां भी हिंदी कविता लिखकर हिंदी का गौरव बढ़ा रही हैं।
डीएम उमेश मिश्रा का जन्म प्रयागराज में हुआ था और उनकी शिक्षा इलाहाबाबाद विवि से हुई। उनको हिंदी के संस्कार पिता एमपी मिश्रा से मिले हैं। उन्होंने कहा कि पिता हिंदी साहित्य सम्मेलन से जुड़े थे, साथ ही हिंदी के शिक्षक थे। इस कारण घर में शुद्ध हिंदी का उच्चारण ही होता था। हिंदी साहित्य सम्मेलन की पत्रिकाओं में आने वाली कविताओं से साहित्य के प्रति रुचि बढ़ गई। कोई पुस्तक तो प्रकाशित नहीं कराई, लेकिन स्वांतह सुखाये के लिए गद्य और पद्य दोनों में लिखता हूं। अब यह हिंदी के संस्कार यहीं से सीमित न रहकर उनकी दोनों बेटियों भाव्या और भावनी को भी मिल चुके हैं। अधिकांश शिक्षा अंग्रेजी माध्यम से लेने के बावजूद दोनों बेटियां हिंदी की कविताएं लिखती हैं। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि आज की पीढ़ी को दुनिया की सभी भाषाएं सीखनी चाहिए, लेकिन अपनी मातृ भाषा भी आनी चाहिए। क्योंकि व्यक्ति जो अभिव्यक्ति अपनी मातृ भाषा में व्यक्त कर सकता है, वह किसी और भाषा में नहीं कर सकता। हमें प्राचीन भारतीय विद्या और विद्याएं दोनों को संरक्षित करने की आवश्यकता है।