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डिग्री शिक्षकों की छुट्टियों पर चली कैंची

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डिग्री शिक्षकों की छुट्टियों पर चली कैंची
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बिजनौर। शासन ने डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को मिलने वाली छुट्टियों पर कैंची चला दी है। शिक्षकों को स्टडी लीव शर्तों के साथ मिलेगी। शीतकालीन अवकाश समाप्त कर दिया है। इतना ही नहीं ग्रीष्म कॉलीन अवकाश एक मुश्त नहीं होगा। डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों में फैसले से असंतोष है। मामले को लेकर फेडरेशन आफ उत्तर प्रदेश कालेज एवं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ अर्थात फुपुक्टा की बैठक 19 सितंबर को बुलाई गई है।
सभी विश्वविद्यालयों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति डिग्री कॉलेजों में शिक्षा सत्र 2021-22 से लागू कर दी गई है। शासन की मंशा है कि शिक्षा सत्र नियमित हो। जिससे नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। इसके लिए लगातार फैसले लिए जा रहे हैं। बताया गया कि इसी क्रम में डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों को मिलने वाली छुट्टियों में कटौती की गई है। रूहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन रुटा के अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि इस बारे में शासन से कॉलेजों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को हायर शिक्षा के लिए स्टडी लीव दिए जाने का प्रावधान है। शासन ने इसे शर्त के साथ लागू करने का निर्णय लिया है। अब शिक्षकों को स्टडी लीव दिए जाने से पहले संबंधित शिक्षक के विभाग में शिक्षकों की स्थिति देखी जाएगी। यदि विभाग में पर्याप्त शिक्षक हैं, जिससे छात्रों का शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं हो, तभी स्टडी लीव मिल सकेगा। कहा कि स्टडी लीव को प्रतिबंधित बनाना सही नहीं है। शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था करके स्टडी लीव दी जा सकती है।
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बताया कि डिग्री कॉलेज के शिक्षकों को मात्र पांच दिन का शीतकालीन अवकाश मिलता है। शासन ने शीतकालीन अवकाश समाप्त कर दिया है। ग्रीष्म कालीन अवकाश के बारे में रूटा अध्यक्ष का कहना है कि शिक्षकों को 30 दिन का ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता है। अब शिक्षक को ग्रीष्मकालीन अवकाश एक साथ नहीं मिलेगा। बल्कि किश्तों में 15-15 दिन का मिलेगा। बताया कि 15 दिन का अवकाश भी कालेज की परिस्थितियों को देखकर दिया जाएगा। शिक्षक भी शिक्षा सत्र नियमित होने तथा छात्रों की पढ़ाई सुचारु होने का प्रबल पक्षधर हैं। परंतु इसके लिए शिक्षकों की छुट्टियों को कम करना या स्टडी लीव नहीं दिया जाना न्यायोचित नहीं है। बताया कि यह नियम देश के सभी विश्वविद्यालयों में प्रभावी है। इसलिए छुट्टियों में कटौती करने समेत शिक्षकों के विभिन्न मांगों पर फैसले के लिए फुपुक्टा की बैठक 19 सितंबर को बुलाई गई है। जरूरत होने पर आंदोलन भी किया जाएगा।
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ये है प्रमुख मांग
1- शिक्षकों की छुट्टियों में कटौती।
2- शिक्षकों की पुरानी पेंशन की बहाली।
3- अधिवर्षता 65 वर्ष हो।
4- पीएचडी / एम फिल उपाधी होने पर अतिरिक्त वेतन-वृद्धि।
5- प्रोफेसर पद नाम दिया जाए।
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