फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीआईसी का जर्जर भवन, जोखिम में विद्यार्थियों की जान

विज्ञापन
बिजनौर के राजकीय इंटर कॉलेज का भवन। - फोटो : BIJNOR
विज्ञापन
जीआईसी का जर्जर भवन, जोखिम में विद्यार्थियों की जान
विज्ञापन

बिजनौर। राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर अंग्रेजों के जमाने में बना था। करीब 110 साल पुराने इस कॉलेज का भवन अब जर्जर हालत में है। लोक निर्माण विभाग ने जांच में भवन को प्रयोग लायक नहीं माना है। कॉलेज में दो हजार से अधिक विद्यार्थी अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे हैं।
राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर जिले का सबसे पहला व पुराना राजकीय विद्यालय है। विभागीय जानकारी के अनुसार कॉलेज को वर्ष 1925 में हाईस्कूल और 1950 में इंटर की मान्यता मिली थी। कॉलेज में छात्रों के पढ़ने के लिए 18 कमरे, प्रयोगशालाएं, प्रधानाचार्य कार्यालय, लिपिक कार्यालय है। विद्यालय में दोनों शिफ्ट में करीब 2100 छात्र पढ़ते हैं। इस समय कॉलेज के भवन की हालत बहुत खस्ता है। कमरों की छतों व दीवारों में दरार आ गई हैं। बरसात में कॉलेज की छत टपकती है। ऐसे में शिक्षक पढ़ाने व छात्र पढ़ने के बजाय बरसाती पानी से बचने में लगे रहते हैं। अभिभावकों ने भवन के खस्ताहाल होने का मामला डीएम के समक्ष रखा था। अभिभावकों ने बच्चों को पढ़ने नहीं भेजने तक की चेतावनी दे दी थी।
विज्ञापन

डीएम के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग अर्थात पीडब्ल्यूडी के तकनीकी अधिकारियों की टीम से भवन की स्थिति की जांच कराई गई थी। टीम ने जांच में भवन को प्रयोग के लायक नहीं बताया था। बताया गया कि टीम ने छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे भवन में स्थानांतरित करने की सलाह दी थी। परंतु कुछ नहीं हुआ। आज भी छात्रों को उन्हीं जर्जर कमरों में पढ़ाया जा रहा है। जो छात्र व शिक्षक दोनों की जान के लिए खतरा है।
गिर चुका है प्रधानाचार्य का आवास
राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर जिले का पहला ऐसा राजकीय विद्यालय बताया गया है। जहां विद्यालय परिसर में ही सबसे पहले प्रधानाचार्य का आवास बना था। कुछ साल पहले आवास भवन पुराना एवं खस्ताहाल होने से भरभरा कर गिर गया था। गनीमत रही कि भवन की खस्ता हालत को देखते हुए प्रधानाचार्य ने अपने परिवार को घटना से कुछ दिन पहले ही दूसरे भवन में भेज हस्तानांतरित कर दिया था। इस तरह एक बड़ा हादसा होने से बचा था।
अभिभावक संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर में छात्रों को जर्जर भवन में पढ़ाए जाने से अभिभावकों में गुस्सा है। नरेंद्र पाल सिंह, ओमवीर सिंह का कहना है कि हर व्यक्ति अपने बच्चों को महंगे पब्लिक स्कूलों में नहीं पढ़ा सकता है। राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर ने अनेक प्रतिभाशाली छात्रों को शिक्षा दी है, जिन्होंने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। कहा कि वे अपने बच्चों की जान जोखिम में डालकर उनकी पढ़ाई करा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का इस ओर ध्यान नहीं देना भी कष्ट देने वाला है। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
विज्ञापन

विद्यालय के सभी कमरे जर्जर नहीं : डीआईओएस
डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि यह बात सही है कि जांच में भवन प्रयोग करने लायक नहीं है। लेकिन कॉलेज के सभी कमरे खराब नहीं हैं। प्रधानाचार्य को छात्रों को क्षतिग्रस्त हिस्से में नहीं जाने देने एवं सुरक्षित स्थान पर बैठाने के निर्देश दे दिए गए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें