गमे हुसैन गमो से रिहाई देता है...
जलालाबाद। यौम-ए-आशूरा पर आयोजित शेरी नशिस्त में शायरों ने हजरत इमाम हुसैन से जुड़े कलाम पेश कर लोगों की आंखों की नम कर दिया। जलालाबाद के गांव कल्हेड़ी में बज्म-ए-उर्दू अदब की ओर से शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। कारी शाकिर रिजवी ने यौम-ए-आशूरा के महत्व बताते हुए शोहबा-ए-कर्बला के शहीदों को याद किया।
उन्होंने हजरत अली हजरत इमाम हुसैन के बताए हुए मार्ग पर चलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा के मानवता को बचाने के लिए जिस तरह से हजरत इमाम हुसैन कर्बला में अपने कुर्बानियों का नजराना पेश किया है। उसी तरह से हमें भी इंसानियत के लिए कुर्बानी का जज्बा अपने दिलों में रखना चाहिए। उस्ताद शायर महेंद्र अशक ने मैं आंसुओं से वजू करके शेर कहता हूं.., सरफराज साबरी ने गमे हुसैन गमो से रिहाई देता है.., डा. आफताब नोमानी ने दुनिया के बिगड़े हुए हालात देखकर, महसूस हो रही है जरूरत हुसैन की.., अख्तर मुल्तानी ने अली का कोई भी सानी नहीं है.., समेत डॉ. इलियास अंसारी, कुमार मोनू रूबा, कारी शाकिर रिजवी, हाजी इखलास हुसैन एड., कारी मो. उस्मान, सिराजुद्दीन मिस्त्री, मो. इदरीस ने अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर हाजी मो. आता, हाफिज मो. शादाब मुल्तानी, एमडी खान, अजीज मुल्तानी, हाजी खुर्शीद अहमद, हाजी मुमताज अहमद, शादाब अहमद, मो. जुनेद, मो. जावेद, मो. आजम, मो. अख्तर, मो. शाकिर, मो. अकील, शाने आलम आदि मौजूद रहे।