बॉलीवुड में जिले का सबसे पहला योगदान कुंवर आदित्यवीर सिंह का माना जाता है। चांदपुर के रहने वाले कुंवर आदित्यवीर सिंह ने मुंबई में थियेटर शो कराकर प्रतिभाओं को मौका मिला। इसके बाद प्रकाश मेहरा की कामयाबी किसी से छिपी नहीं है। अमिताभ बच्चन और प्रकाश मेहरा की जोड़ी कभी कामयाबी की बहुत बड़ी गारंटी मानी जाती थी।
शाहरुख खान की फिल्म जोश में काम करने वाले सुशांत सिंह का बचपन बिजनौर में ही बीता है। जोश फिल्म जब सिनेमा हॉल में लगी थी तब काफी लोग केवल सुशांत सिंह को देखने के लिए गए थे। सुशांत को बिजनौर में सुशांत सिंह बिजनौरी के नाम से जाना जाता है। सावधान इंडिया के जरिये वे देश के घर घर में पहुंच चुके हैं।
संदीपनाथ के गीत, दानिश जावेद की स्क्रिप्ट
आशिकी-2 के गीत सुन रहा है ना तू रो रहा हूं मैं से रोमांस का नया आयाम स्थापित करने संदीप नाथ भी बिजनौर के हैं। उन्होंने सांवरिया, रंगरेज सहित कई फिल्मों के गाने लिखे हैं। संदीप नाथ डीएनए में गांधी जी फिल्म भी बना रहे हैं। संन्यासी मेरा नाम, तराजू और छोटे सरकार फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने वाले दानिश जावेद भी बिजनौर के रहने वाले हैं।
वे स्क्रिप्ट राइटर एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे कई धारावाहिक भी लिख चुके हैं। दानिश जावेद मायानगरी में कई अवॉर्ड भी जीत चुुके हैं। वे जाने-माने शायर भी हैं। इसके अलावा जिले में कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। फिल्म घुंघरू के एक गाने की शूटिंग बिजनौर में बैराज पर बने शीश महल में हुई थी। कुछ साल पहले आई फिल्म लंका की शूटिंग भी बिजनौर में हुई थी।
फिल्म की शूटिंग में दिग्गज कलाकार मनोज वाजपेयी बिजनौर आए थे। जिले के काफी युवा जो किस्मत आजमाने मुंबई आदि नहीं जा पा रहे हैं वे अपने शौक और हुनर को यू ट्यूब से निखार रहे हैं। काफी युवाओं ने यू ट्यूब चैनल बना रखे हैं। वे इससे अपनी प्रतिभा को सभी के सामने रख रहे हैं। फिल्म सिटी पास में बनने से इन युवाओं को और पहचान मिलेगी।
विशाल का बिजनौर में हुआ जन्म, मेरठ में परवरिश
विशाल भारद्वाज भारतीय हिंदी फिल्म उद्योग बॉलीवुड के एक प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार, पटकथा लेखक व निर्देशक हैं। उन्हे गॉडमदर और इश्किया के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। विशाल भारद्वाज का जन्म 04 अगस्त 1965 में बिजनौर जिले के शिकारपुर गांव में हुआ था। उनका बचपन मेरठ में गुजरा।
उनके पिता राम भारद्वाज शुगरकेन इंस्पेक्टर थे और शौकिया तौर पर हिंदी फिल्मों के लिए गाने लिखते थे। पिता यह चाहने पर उन्होंने संगीत सीखा। दिल्ली आने पर एक दोस्त की वजह से उनकी संगीत में दिलचस्पी हुई।
शुरुआती दौर मे उन्होंने पेन म्यूजिक रिकॉर्डिंग कंपनी में भी काम किया। तभी दिल्ली में उनकी मुलाकात गुलजार साहब से हुई। गुलजार के साथ उन्होंने ‘चड्डी पहन के फूल खिला है’ गीत की रिकॉर्डिंग की। उसके बाद से उन्हें माचिस के लिए संगीत बनाने का मौका मिला।