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प्रकाश मेहरा नहीं रोकते तो स्टार नहीं होते अमिताभ बच्चन, यूपी के बिजनौर से निकले ये बाॅलीवुड सितारे

Thu, 24 Sep 2020 01:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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प्रकाश मेहरा - फोटो : BIJNOR
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने ट्वीट में कहा कि जिस शकुंतला पुत्र भरत के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा। उसी हस्तिनापुर के आसपास का क्षेत्र हमने फिल्मसिटी को प्रस्तावित किया है। यमुना अथॉरिटी की ओर से उसके लिए प्रजेंटेशन भी प्रस्तुत किया गया है।
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योगी आदित्यनाथ ने फिल्म सिटी की स्थापना शकुंतला पुत्र भारत की स्थली के पास करके इस क्षेत्र के विकास के रास्ते खोल दिए हैं। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यहां कि प्रतिभाओं को फिल्म में आगे आने को अवसर मिलेगा। पहले भी बिजनौर की प्रतिभाएं फिल्मी दुनिया में अपना लोहा मनवाती रही हैं। फिल्मी जगत में बिजनौर का योगदान कम नहीं है।

फिल्म फ्लॉप होने पर घर जा रहे अमिताभ बच्चन को अगर प्रकाश मेहरा नहीं रोकते तो अमिताभ बच्चन स्टार नहीं होते। बाकी लोगों ने भी किसी न किसी रूप में बॉलीवुड में नाम कमाया है और बॉलीवुड को चमकाया है। ये कलाकार अब वेस्ट यूपी में फिल्म सिटी खुलते देखना चाहते हैं।
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बॉलीवुड में जिले का सबसे पहला योगदान कुंवर आदित्यवीर सिंह का माना जाता है। चांदपुर के रहने वाले कुंवर आदित्यवीर सिंह ने मुंबई में थियेटर शो कराकर प्रतिभाओं को मौका मिला। इसके बाद प्रकाश मेहरा की कामयाबी किसी से छिपी नहीं है। अमिताभ बच्चन और प्रकाश मेहरा की जोड़ी कभी कामयाबी की बहुत बड़ी गारंटी मानी जाती थी।

शाहरुख खान की फिल्म जोश में काम करने वाले सुशांत सिंह का बचपन बिजनौर में ही बीता है। जोश फिल्म जब सिनेमा हॉल में लगी थी तब काफी लोग केवल सुशांत सिंह को देखने के लिए गए थे। सुशांत को बिजनौर में सुशांत सिंह बिजनौरी के नाम से जाना जाता है। सावधान इंडिया के जरिये वे देश के घर घर में पहुंच चुके हैं।

संदीपनाथ के गीत, दानिश जावेद की स्क्रिप्ट
आशिकी-2 के गीत सुन रहा है ना तू रो रहा हूं मैं से रोमांस का नया आयाम स्थापित करने संदीप नाथ भी बिजनौर के हैं। उन्होंने सांवरिया, रंगरेज सहित कई फिल्मों के गाने लिखे हैं। संदीप नाथ डीएनए में गांधी जी फिल्म भी बना रहे हैं। संन्यासी मेरा नाम, तराजू और छोटे सरकार फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने वाले दानिश जावेद भी बिजनौर के रहने वाले हैं।

वे स्क्रिप्ट राइटर एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे कई धारावाहिक भी लिख चुके हैं। दानिश जावेद मायानगरी में कई अवॉर्ड भी जीत चुुके हैं। वे जाने-माने शायर भी हैं। इसके अलावा जिले में कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। फिल्म घुंघरू के एक गाने की शूटिंग बिजनौर में बैराज पर बने शीश महल में हुई थी। कुछ साल पहले आई फिल्म लंका की शूटिंग भी बिजनौर में हुई थी।

फिल्म की शूटिंग में दिग्गज कलाकार मनोज वाजपेयी बिजनौर आए थे। जिले के काफी युवा जो किस्मत आजमाने मुंबई आदि नहीं जा पा रहे हैं वे अपने शौक और हुनर को यू ट्यूब से निखार रहे हैं। काफी युवाओं ने यू ट्यूब चैनल बना रखे हैं। वे इससे अपनी प्रतिभा को सभी के सामने रख रहे हैं। फिल्म सिटी पास में बनने से इन युवाओं को और पहचान मिलेगी।

अख्तर के डायलॉग ने मचाई फिल्मों में धूम
चुनाये सेठ जिनके घर शीशे के हों, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते..., ये बच्चों के खेलने की चीज नहीं, हाथ में लग जाए तो खून निकल आता है। 70 के दशक में बनी फिल्म वक्त के इन डायलॉग ने अपने जमाने में खूब धूम मचाई।

फिल्म 'वक्त' ही नहीं, बल्कि अपने दौर की रोटी, सोना चांदी, अपराध, हमराज, गुमराह, आदमी, दाग जैसी तमाम मशहूर फिल्मों में डायलॉग लिखने और फिल्म लहू पुकारेगा का निर्देशन करने वाले मरहूम अख़्तर-उल-ईमान बिजनौर जिले के छोटे से गांव राहूखेड़ी (नजीबाबाद) में 12 नवंबर 1915 को सामान्य परिवार में जन्मे अख्तर साहब की उच्च शिक्षा अलीगढ़ से हुई। शिक्षा पूरी कर अख़्तर साहब ने मुंबई का रुख किया और फिल्म डायरेक्टर बीआर चोपड़ा के साथ काम करने लगे।

यहीं से फिल्मी दुनिया में इनकी एंट्री दर्ज हुई। फिर क्या था, अख़्तर साहब लिखते गए और बॉलीवुड की दुनिया में नाम कमाते गए। फिल्म वक्त, फूल और पत्थर एवं रोटी में लिखे डायलॉग काफी चर्चित रहे। धर्मवीर और वक्त के डायलॉग के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड मिला। फिल्म लहु पुकारेगा का निर्देशन भी किया, हालांकि यह फिल्म धूम नहीं मचा पाई।

फिल्म डायलॉग लिखने के अलावा अख़्तर साहब ऊर्द नज्म के मशहूर शायर भी थे। अख्तर उल ईमान का 09 मार्च 1996 को निधन हो गया। फिल्म अभिनेता अमजद खान से अख्तर उल ईमान की बड़ी बेटी शहला का विवाह हुआ था। शहला के अतिरिक्त दो बेटियां इस्मा और रखशंदा, एक बेटा रामिश है। रामिश फिल्मों में काम करते हैं।
 
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विशाल का बिजनौर में हुआ जन्म, मेरठ में परवरिश
विशाल भारद्वाज भारतीय हिंदी फिल्म उद्योग बॉलीवुड के एक प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार, पटकथा लेखक व निर्देशक हैं। उन्हे गॉडमदर और इश्किया के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। विशाल भारद्वाज का जन्म 04 अगस्त 1965 में बिजनौर जिले के शिकारपुर गांव में हुआ था। उनका बचपन मेरठ में गुजरा।

उनके पिता राम भारद्वाज शुगरकेन इंस्पेक्टर थे और शौकिया तौर पर हिंदी फिल्मों के लिए गाने लिखते थे। पिता यह चाहने पर उन्होंने संगीत सीखा। दिल्ली आने पर एक दोस्त की वजह से उनकी संगीत में दिलचस्पी हुई।

शुरुआती दौर मे उन्होंने पेन म्यूजिक रिकॉर्डिंग कंपनी में भी काम किया। तभी दिल्ली में उनकी मुलाकात गुलजार साहब से हुई। गुलजार के साथ उन्होंने ‘चड्डी पहन के फूल खिला है’ गीत की रिकॉर्डिंग की। उसके बाद से उन्हें माचिस के लिए संगीत बनाने का मौका मिला।
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