इंसानियत के जज्बे से लबरेज बिजनौर शहर की एक हवेली में परिंदों का आशियाना बना है। पीढ़ियों से चल रही बेजुबान परिंदों की सेवा के इसी जज्बे के चलते अब हवेली की पहचान भी बदल गई है। शहर और आसपास इलाके में इस हवेली को गौरेया वाली हवेली का नया नाम मिला है। किसी भी दौर में मदद का सिलसिला थमा नहीं। इसके लिए परिवार में वसीयत संग इन परिंदों की देखरेख की जिम्मेदारी भी अगली पीढ़ी को सौंपी जाती है। इस हवेली में गौरैया के अलावा कई अन्य पक्षियों की चहक मानो कोई मधुर संगीत की तरह सुनाई देती है।
नगर में मोहल्ला शेखान की तंग गलियों में शेख अकबर हुसैन की हवेली है। जिसमें लगभग 300 वर्षो से गौरैया का आशियाना बना हुआ है। आज के युग में जहां गौरैया जैसे पक्षी लुप्त होते जा रहे हैं, वहीं इस हवेली में आज भी लगभग दो हजार गौरैया के चहकने की आवाज सुनाई देती है। यहां पूर्वज मरते समय हवेली की विरासत के साथ-साथ अपनी संतान को गौरैयों की परवरिश व उनके देखभाल का जिम्मा भी देते हैं। जिस जिम्मेदारी को शेख जमाल ने बखूबी निभाया और अब उनके इस काम में उनका पुत्र फराज शेख कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। इसी के कारण आज इस हवेली में हजारों गौरैयों का भी घर है। फराज शेख ने अब इंदिरा पार्क बिजनौर में मात्र छह माह में गौरैया लाने का वादा किया है।