नदी में तलाश करते गोताखोर।
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार शाम साढ़े चार बजे दोनों भाई धर्मेंद्र और विजेंद्र पुत्र करन सिंह करीब 50 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ मूर्ति विसर्जित करने के लिए भूतपुरी स्थित रामंगगा घाट पर आए थे। रामगंगा पुल से करीब 800 मीटर दूर पांच अन्य युवकों के साथ विसर्जित करने के लिए दोनों गणपति जी की मूर्ति लेकर नदी में उतर गए। अचानक दोनों मूर्ति के साथ बहते हुए नदी में काफी दूर चले गए, जबकि अन्य युवक किसी तरह निकल आए।
जत्थे में शामिल लोग किनारे पर खड़े दोनों भाइयों के सकुशल होने की प्रार्थना करते रहे।
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देखते ही देखते धर्मेंद्र और विजेंद्र लोगों की आंखों से ओझल हो गए। साथ में आया कोई व्यक्ति उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। सूचना पर सीओ आलोक सिंह और थानाध्यक्ष सुमित राठी, ग्राम प्रधान मोहम्मद उमर स्थानीय गोताखोरों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों को तलाश किया लेकिन उनका कहीं पता नहीं लग सका। एसडीएम स्मृति मिश्रा ने बताया कि अंधेरा होने के कारण फिलहाल तलाश रोक दी गई थी। एनडीआरएफ को बुलाया गया है।
मौके पर लगी लोगों की भीड़।
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शादीशुदा हैं दोनों भाई
नदी में डूबे दोनों भाई शादीशुदा हैं और उनके छोटे बच्चे हैं। सूचना पर अग्निशमन कर्मी भी मौके पर पहुंच गए। अंधेरा होने के कारण स्थानीय गोताखोर दोनों की तलाश करने के बाद नदी से बाहर आ गए। मौके पर तहसील स्टाफ के अलावा गोताखोर अलंसार फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहम्मद शाहरुख, स्वेज, सुवैद, सद्दाम, फईम, खालिद, सरवर, सलमान, दानिश व कासिम आदि तलाश में जुटे रहे। सीओ ने बताया कि बुधवार सुबह फिर से तलाश शुरू की जाएगी।
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