काश्तकारों को आवंटित कर दी वन विभाग की जमीन
बढ़ापुर (बिजनौर)। बढ़ापुर वन रेंज की 127 बीघा जमीन काश्तकारों को आवंटित कर दी गई। इस मामले में डीएम के आदेश पर बढ़ापुर वन रेंज की ओर से नजीबाबाद के तत्कालीन चकबंदी अधिकारी के विरुद्ध जालसाजी समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
पुलिस में दर्ज कराए केस में बढ़ापुर रेंज के वन दरोगा मोहित कुमार ने कहा है कि राज्यपाल ने भारतीय वन अधिनियम 1927 की विज्ञप्ति धारा 20 के अधिकारों के तहत 21 अप्रैल 1988 को बढ़ापुर रेंज क्षेत्र के विजयपुर के खसरा संख्या 5/8 क्षेत्रफल 127 बीघा 18 बिस्वा को रिजर्व फारेस्ट घोषित किया था। भारतीय वन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार धारा 20 के अधीन अधिसूचना जारी कर किसी भूमि को आरक्षित वन घोषित करने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है। भूमि पर किसी व्यक्ति का किसी प्रकार का दावा समाप्त हो जाता है। आरोप लगाया गया कि नजीबाबाद के तत्कालीन चकबंदी अधिकारी राजेश कुमार देवरार ने काश्तकारों को अनुचित लाभ पहुंचाते हुए वन विभाग की भूमि जिस पर वन विभाग का पुराना वन खड़ा है और वन विभाग के कब्जे में है, को काश्तकारों को आवंटित कर दिया।
चकबंदी अधिकारी राजेश कुमार देवरार ने जुलाई 2014 में एक आदेश पारित कर भूमि को गलत ढंग से काश्तकारों को आवंटित कर सरकार को करोड़ों रुपयों की हानि पहुंचाई है। इस मामले की जानकारी होने पर डीएफओ नजीबाबाद ने इस संबंध में डीएम को पत्र लिखकर आरोपी चकबंदी अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। इसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने चकबंदी अधिकारी के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे।