जिला अस्पताल में आठ माह से नहीं हैं एंटी रेबीज इंजेक्शन
बिजनौर। रेबीज से जनता की जान बचाने के लिए चलाए जा रहा एंटी रेबीज अभियान अब केवल कागजों पर ही चल रहा है। जिले में करीब आठ महीने से एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं है। मरीज परेशान होकर इधर उधर भटक रहे हैं और निजी चिकित्सकों के यहां एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवा रहे हैं।
कुत्ता, बंदर आदि के काटने पर रेबीज होने की आशंका रहती है। रेबीज से बचाव के लिए एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना होता है। अगर रेबीज से ग्रस्त कोई पशु किसी को भी काट ले और वह इंजेक्शन न लगवाए तो वह भी रेबीज से ग्रसित हो जाएगा। जिला अस्पताल और सभी सीएचसी, पीएचसी पर एंटी रेबीज इंजेक्शन नि:शुल्क लगाए जाते हैं। जिला अस्पताल में तो एक कक्ष केवल एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाने के लिए ही निर्धारित है। यहां पर हर कार्य दिवस में 100 से अधिक लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इसके अलावा जिले भर में एक दिन में 500 से अधिक इंजेक्शन लगते थे, लेकिन इस सुविधा को ग्रहण लग गया है।
करीब आठ माह से स्वास्थ्य विभाग को एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं मिली है। अब भी हर रोज 20 से अधिक मरीज जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने के लिए आ रहे हैं, लेकिन दवाई न होने पर उन्हें मायूस लौटना पड़ता है। लोगों का कहना है कि सरकार ने कोरोना के चक्कर में बाकी रोगों की ओर ध्यान देना कम कर दिया है।
दवा मिलने पर ही लगेंगे इंजेक्शन
सीएमएस डा.अरुण कुमार के अनुुसार काफी समय से एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं आए हैं। दवाई आने पर ही मरीजों को इंजेक्शन लगाए जाएंगे। किसी को लगता है कि उसे रेबीज ग्रसित जानवर ने काटा है तो उसे यह इंजेक्शन जरूर लगवाना चाहिए।