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अमर उजाला अभियान : जिलें में हर दिन फूंक रहे औसतन 15 ट्रांसफार्मर

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बिजनौर मे विद्युत वर्कशॉप के बाहर गाड़ी में रखे फुंके ट्रांसफार्मर। - फोटो : BIJNOR
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अमर उजाला अभियान : जिलें में हर दिन फूंक रहे औसतन 15 ट्रांसफार्मर
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बिजनौर। जनपद का तापमान 40 डिग्री से पार जा रहा है, वैसे ही नलकूपों और आबादी के लिए रखे ट्रांसफार्मर धधक रहे हैं। ओवरलोडिंग के कारण पिछले 10 दिन में करीब 150 ट्रांसफार्मर फुंक गए हैं। ट्रांसफार्मर भले ही 24 और 48 घंटे में उपभोक्ता तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन उपभोक्ता को ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग के कागज बनवाने के लिए बिजलीघरों पर चक्कर लगाने पड़ते हैं। आबादी का हाल यह है कि 25 केवीए के ट्रांसफार्मर पर 40 केवीए लोड चल रहा है।
गर्मी बढ़ने से बिजली खपत भी बढ़ रही है। बिजली का लोड बढ़ने से गर्मी में ट्रांसफार्मर फुंकने सिलसिला बढ़ जाता है। गर्मी में फसलों की सिंचाई के लिए किसान नलकूप चला रहे हैं। सभी नलकूप चलने तथा आबादी क्षेत्र में भी बिजली की खपत ज्यादा होने से ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो रहे हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि आबादी व नलकूपों पर ट्रांसफार्मर की क्षमता से अधिक कनेक्शन देना है। वर्तमान में नलकूपों के ट्रांसफार्मर फुंकने की संख्या ज्यादा है। 25 केवीए के एक ट्रांसफार्मर पर 40 केवीए तक का लोड चल रहा है। तापमान बढ़ने पर और लोड बढ़ने पर ट्रांसफार्मर ज्यादा फूंक रहे हैं। वर्कशॉप के आंकड़ों पर नजर डालें तो निजी नलकूपों के ट्रांसफार्मर गर्मी में ज्यादा फुंक रहे हैं। इसमें भी 25 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफार्मर की संख्या ज्यादा है। 25 केवीए ट्रांसफार्मर नलकूपों पर ज्यादा ओवरलोड चल रहे हैं। गर्मी और ओवरलोडिंग की वजह से ट्रांसफार्मर ज्यादा फुंक रहे हैं। आबादी, नलकूपों के ट्रांसफार्मर पर क्षमता से अधिक कनेक्शन या कनेक्शनों भार ज्यादा होने पर फुंक रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो 25 केवीए के ट्रांसफार्मर पर 35 से 40 का लोड चल रहा है। कागजों में नलकूप का भार 7 से 10 एचपी तक होता है, लेकिन मौके पर उससे अधिक भार की मोटर चलती हैं, जिससे ट्रांसफार्मर पर भार बढ़ता है।
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आंधी में भी खराब हुए ट्रांसफार्मर
इसी माह पिछले 10 दिन में दो बार जनपद में आंधी आई। आंधी में बिजली की लाइन के साथ ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त में हुए। दोनों आंधियों में करीब 22 ट्रांसफार्मर को क्षति पहुंची थी। शासन ने फुंके ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया बड़ी सरल कर दी है, लेकिन किसान के लिए यह डगर भी कठिन है। अब नियम यह है की ट्रांसफार्मर फुंकने पर किसान को उसकी सूचना बिजलीघर पर तैनात जेई या स्टाफ को देनी होती है। वह ऑनलाइन कागज बनाकर और ऑफलाइन स्वयं विभाग कार्यालय और वर्कशॉप को उपलब्ध कराएंगे। परंतु बिजलीघर पर ही किसानों को दो-तीन दिन चक्कर लगाने पड़ते हैं। तब जाकर कागज कार्यालय और वर्कशॉप पहुंचते हैं। यहां से ट्रांसफार्मर उपभोक्ता तक पहुंचा दिया जाता है। ट्रांसफार्मर लाने और पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की होती है।
प्रतिदिन फुंक रहे ट्रांसफार्मर
तिथि फुंके ट्रांसफार्मर
11 मई - 27
12 मई - 17
13 मई - 14
14 मई -11
15 मई -17
16 मई - 14
17 मई -13
18 मई -17
19 मई - 16
(नोट : ट्रांसफार्मर फुंकने के आंकड़े वर्कशॉप से लिए गए हैं)
ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर फुंकने का ज्यादा कारण रहता है। जैसे ही उन पर रिपेयरिंग के कागज आ जाते हैं वैसे ही 24 घंटे से 48 घंटे के अंदर उपभोक्ता तक नया ट्रांसफार्मर पहुंचा दिया जाता है - सुशील कुमार, एसडीओ वर्कशॉप
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कागज बनवाने में लग जाते हैं कई दिन : संदीप कुमार
किसान संदीप कुमार का कहना है कि शासन और विभाग ने ओके ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग के लिए व्यवस्था को सरल बनाया है, लेकिन निचले स्तर पर कागज बनाने में ही दो-तीन दिन लगा देते हैं। किसान रामअवतार सिंह का कहना है गर्मी आते ही फसलों को सिंचाई की ज्यादा आवश्यकता होती है। ऐसे में ट्रांसफार्मर फुंकने से और परेशानी बढ़ती है। क्योंकि एक ट्रांसफार्मर पर कई किसान होते हैं, उनमें से किसी एक का बिल जमा न हो तो अवर अभियंता कागज बनाने में परेशान करते हैं। भीषण गर्मी के दिनों में तीन-चार दिन और सिंचाई करने में देर होना फसल के लिए हानिकारक होता है।
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