फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मौला-ए-कायनात को नजराना ए अकीदत

Sun, 21 May 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
नजीबाबाद में जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में सीनाजनी करते सोगवार। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बिजनौर के नजीबाबाद में जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में मातमी जुलूस और मजलिसों से वातावरण गमगीन है। जुलजना, अलम आदि के मातमी जुलूस के साथ सोगवार सीनाजनी के साथ करबला के शहीदों को खिराज ए अकीदत पेश कर रहे हैं।
विज्ञापन


उधर, खिताब करते हुए शिया विद्वानों ने हजरत इमाम हुसैन के किरदार को अमल में लाकर दीन की हिफाजत करने, इंसानियत और मुहब्बत का पैगाम आम जन तक पहुंचाने की सलाह दी। नजफे हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह में मौला अली की बारगाह में नजराना ए अकीदत पेश करने का सिलसिला जारी है।

नम आंखों से लोग दरगाह की जियारत कर हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों को याद कर मन्नतें मांगने में मशगूल हैं। उधर, नसीमुल बाकरी के संचालन में शम्सुल हसन हॉल से मातमी मजलिसों में शिया विद्वानों का खिताब लगातार जारी है।
विज्ञापन


मौलाना इकरार ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि संगठित होकर किसी भी जंग को जीता जा सकता है। हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत और ईमान की जंग जीती। कई अन्य शिया विद्वानों ने वाकयाते करबला बयां किया, तो जायरीन सीनाजनी पर विवश हुए।

शनिवार को दिन भर मातमी जुलूस बरामद किए गए। अंजुमन लश्करे हुसैन, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, अंजुमन इरफान ए अजा, अंजुमन यादगारे हुसैन, अंजुमन अब्बासिया, अंजुमन सोगवारे हुसैन, अंजुमन अजाए हुसैन, अंजुमन सिपाहे अब्बासिया के साथ छोटी बच्चियों की अंजुमन फिदा ए सकीना ने भी मातमी आयोजनों में शिरकत की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें