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बनैली नदी के उफान से तटीय गांव जलमग्न, लोगो में मचा हा हाकार

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फोटो एक व एक से आगे तक
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अफजलगढ़/ शेरकोट/धामपुर। पहाड़ों पर लगातार बारिश जारी रहने से बनैली नदी में उफान आ गया। पानी देख गांववासियों में दहशत है। भूतपुरी के आसपास के कई गांव जलमग्न हो गए।
शुक्रवार को बनैली नदी में उफान आने से राजकीय इंटर कालेज शाहपुर जमाल केवीएम स्कूल, श्री साईं पब्लिक स्कूल, प्राथमिक विद्यालय शाहपुर जमाल के स्कूल स्टाफ ने स्कूली बच्चों की छुट्टी कर दी। गांव माननगर में पानी घुसने से धर्मा पुत्र परवीन की झोपड़ी गिर गई। झोपड़ी में रखा खाद्यान्न पानी से खराब हो गया। गांव के पूरन पुत्र नन्हें व हरपाल पुत्र मुंशीराम सिंह के मकान की दीवार दरक गई। जबकि होरी सिंह व अन्य ग्रामीणों के लकड़ी उपले, भूसा बाढ़ के पानी में बह गया। गांववासियों ने माननगर शाहपुरजमाल मार्ग पर मिट्टी लकड़ी कूड़ा डालकर पानी को गांव में घुसने से रोकने का प्रयास किया। परंतु पानी के तेज बहाव में गांववासियों के सारे प्रयास नाकाम रहे। दल्लीवाला की नई बस्ती के आवासीय पट्टों में बने मूलचंद, भस्सू सिंह ,ओमप्रकाश सिंह, परसादी सिंह, हरिराज सिंह, ओमप्रकाश, रामवीर, बलबीर सिंह, लीलावती, हरिओम सिंह के घर पानी से जलमग्न हो गया। गांववासियों के पास खाने पीने का सामान कुछ नहीं बचा। उधर मनोहरवाली व शाहपुरजमाल में पानी घुसने पर चक्की स्वामी दिलावर ने ट्रैक्टर ट्राली में अनाज भरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। गांव आलमपुर गांवड़ी, टांडा बैरागी, आसफाबाद चमन, भटपुरा, भूतपुरी, चतरपुर, मनोहरवाली आदि तटीय गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है। राजकीय इंटर कालेज व प्राथमिक विद्यालय शाहपुरजमाल के प्रांगण में भी पानी कई फुट खड़ा हो गया। किसानों अरविंद, जयभगवान, जीवन सिंह, भूदेव, अर्जुन, संजू, करौड़ी, शेर सिंह, किशन, महिपाल, सोमपाल, घसीटा, मुंशीराम, मनोज, रामसिंह, हिम्मत सिंह, राजीव कुमार, इंद्रपाल, टप्पी, लाला, नितिन कुमार, रघुनाथ, विजय कुमार, ओमपाल, राजेश आदि धान व गन्ने की फसल पानी में डूब गई। किसानों ने फसलों की लाखों की रूपये की क्षति बताई है। उधर गांव आसफाबाद चमन में बनैली नदी की धार ने अपना रुख गांव की ओर मोड़ लिया। नदी की धार का रूख गांव की तरफ होने से किसानों की जमीन कटने लगी है। किसानों की फसलों में पानी भरकर खड़ा हो गया। गांववासियों में हाइवे 74 के टूटने का खतरा सता रहा है। गांव में पलायन की स्थिति पैदा हो गई है। कुछ गांववासियों ने सुरक्षित स्थानों पर परिवार व बच्चों को पहुंचाना शुरू कर दिया है। गांव संजय, चेतन, सुधीर, विपिन, गेंदा, मंगला, अमर सिंह, भारत का आरोप है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों से बनैली नदी का तटबंध बनवाने की मांग की। लेकिन न तो प्रशासन ने तटबंध बनाने की सुध ली और न ही जनप्रतिनिधियों से गांववासियों की परेशानी से कोई सरोकार समझा है। गांव कादराबाद में बारिश के पानी से नहर टूटने से इंटर कॉलेज फार्म में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई। शेरकोट के गांव कोपा में भी नदी का पानी घुसने लोगों का काफी नुकसान हो गया है। लोगों का कहना है कि अभी भी पानी का उतार नहीं हुआ है। यदि पहाड़ों पर इसी तरह से बारिश होती रही तो तबाही मच सकती है। देर शाम खौ नदी का जलस्तर बढ़ गया। टंडेल आरपी सिंह ने बताया कि खौ में 43 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। नदी में अधिक पानी आने से किनारे पर बसे गांव मिर्जापुर, हादकपुर, तिपरजोत, कोपा, नंगला, धुराड़ा के ग्रामीणों में खलबली मच गई है। कोपा और मंधौरा गांव की मुख्य सड़कों पर कई फुट पानी सरपट दौड़ रहा है। शेरकोट कोपा मार्ग पर बना पुलिया ध्वस्त हो गया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि सूचना के बाद भी कोई अधिकारी उनकी सुध लेने गांव में नहीं पहुंचा।
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एसडीएम की गाड़ी फंसी
नदी में उफान आने के बाद एसडीएम वीकबे सिंह ने जलमग्न गांवों का जायजा लिया। ग्रामीणों ने एसडीएम के सामने रोकर अपना दुखड़ा सुनाया। एसडीएम से ग्रामीणों ने उचित मुआवजे की मांग की। रास्ते खराब होने की वजह से गांवों का दौरा करते हुए एसडीएम की गाड़ी दलदल में फंस गई। ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल के साथ एसडीएम की गाड़ी को बाहर निकलवाया।
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कालागढ़। कालागढ़ में 267 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। भारी बारिश के चलते सैंडिल बांध पर पहाड़, मुख्य बांध के मार्ग पर पेड़ टूटकर गिरने से रास्ता जाम हो गया। शेरकोट के खो बैराज से पानी की निकासी 44 हजार क्यूसेक की जा रही है।
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नुकसान का पता करने को राजस्व टीम लगाई
एसडीएम वीके सिंह का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र का दौरा किया है। गांवासियों का नुकसान हुआ है। जिसके आंकलन के लिए राजस्व टीम को लगाया गया है। बनैली नदी में किसी बांध से पानी नहीं छोड़ा गया। बारिश का पानी है। नदी में उफान आने की वजह से पानी गांवों में पहुंचा। जिसकी वजह से गांववासियों को परेशानी हुई है। शाम तक नदी का पानी उतरने से लोगों ने राहत ली। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को नदी का पानी ओर आने से रोकने के लिए मजबूत बंदोबस्त करने के निर्देश दिए हैं।
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पीली डैम से पानी छोड़ा
जेई लोकेंद्र कुमार का कहना है कि पहाड़ों पर हो रही तेज बारिश से पीली डेम का जलस्तर बढ़ गया था। रात्रि में जलस्तर बढ़ाने के बाद डेम से पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। एक्सईएन आरके शर्मा से बात करने का प्रयास किया गया। पर उन्होंने घंटे जाने के बाद भी कॉल रिसीव नहीं की।
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