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आपदा में भी 22 महिलाओं ने निभाई परिवार नियोजन की जिम्मेदारी

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आपदा में भी 22 महिलाओं ने निभाई परिवार नियोजन की जिम्मेदारी
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बिजनौर। आपदा में भी महिलाओं ने परिवार नियोजन की जिम्मेदारी निभाई है। शासन के निर्देश पर 11 से 31 जुलाई तक चलाये गए विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े के अंतर्गत 22 महिलाओं ने परिवार नियोजन के स्थायी साधन यानी नसबंदी को अपनाया है और केवल एक ही पुरुष ने अपनी नसबंदी (एनएसवी) कराई। इसके अलावा लगभग सात महिलाओं ने परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों की ओर रुख किया, जबकि ऐसे मामलों में पुरुषों की संख्या एक लाख 1692 है।
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कोरोना महामारी के काल में भी महिलाएं ने परिवार नियोजन की जिम्मेदारी निभाने से पीछे नहीं हट रही हैं। आपदा में भी परिवार नियोजन को लेकर 31 जुलाई तक विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े आयोजन किया गया। महिला नसबंदी के मामले में जिले की 22 महिलाओं ने परिवार नियोजन के स्थायी साधन नसबंदी को अपनाया है। परिवार कल्याण के अपर शोध अधिकारी राजकुमार वर्मा ने बताया कि इच्छुक महिलाओं की पहले ट्रूनॉट मशीन से कोरोना संबंधी जांच की गई। इसके बाद में ही महिलाओं को नसबंदी की सुविधा प्रदान की गई। पहले चरण में इच्छुक दंपतियों का पंजीकरण किया गया। दूसरे चरण में परिवार नियोजन सेवा प्रदायगी पखवाड़ा का आयोजन किया गया। इस दौरान आशा कार्यकर्ता, संगिनी और एएनएम ने दंपतियों को आबादी नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और एनएसवी कराने के लिए प्रेरित किया। एआरओ ने बताया कि 11 से 31 जुलाई तक चले विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े के दौरान 4411 महिलाओं ने छाया (सप्ताह में खाने वाली गोली), 2036 पिल्स (रोजाना खाई जाने वाली गोली), 648 आईयूसीडी और 172 प्रसव के तुरंत बाद होने वाले ऑपरेशन (पीपीआईयूसीडी) को अपनाया, जबकि लगभग एक लाख 1692 पुरुषों ने परिवार नियोजन के अस्थायी साधन को अपनाया।
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