कालागढ़ रेंज में 10, मोरघाटी रेंज में आठ क्रू सेंटर
कालागढ़। वनों में आग की घटनाओं पर नियंत्रण पाने के लिए वन विभाग ने कालागढ़ रेंज में 10 एवं मोर घाटी की रेंज में आठ क्रू सेंटर बनाए हैं। दोनों ही रेंज में वन विभाग के गश्ती दल फायर ड्रिल कर सूखी पत्तियों को जलाकर नष्ट कर रहे हैं।
लगातार बढ़ते जा रहे तापमान एवं गर्म हवाओं ने वनों में आग की आशंका बढ़ गई है। पेड़ों और झाड़ियों से गिरने वाली पत्तियां भूमि पर फैलती जा रहीं हैं। झाड़ियां भी सूखने लगी हैं। वनों में जरा सी भी चिंगारी बड़ी आग का कारण बन सकती है। सूखी पत्तियों को गश्ती दल इकट्ठा कर फायर ड्रिल कर जला रहे हैं। कालागढ़ रेंज के अंतर्गत कालागढ़ दक्षिणी, लकड़घाट, धारा, खटपानी, पीपल सोती, गौजपानी पूर्वी, गौजपानी उत्तरी, जमुनाग्वाड उत्तरी, मोहन पाली, पटेर पानी दक्षिणी, पटेर पानी उत्तरी, बोक्साड़, कांदरू तथा सैंडल बांध बीट के लिए दस क्रू सेंटर कॉलोनी गेट, लकड़घाट, धारा, खटपानी, गौज पानी, जमुनाग्वाड बंक पानी, पटेर पानी, कांदरू एवं सैडिल बांध व कालागढ़ टाइगर रिजर्व की मोरघाटी रेंज की मोरघाटी, कालू शहीद पश्चिम एवं पूर्वी, नलकट्टा, कालागढ़ पश्चिम, शीशमखत्ता, तुनो, रामगंगा बांध प्रथम एवं रामगंगा बांध द्वितीय के लिए आठ क्रू सेंटर मोरघाटी, कालू शहीद पूर्वी एवं पश्चिमी, नलकट्टा, कालागढ़ पश्चिम, शीशमखत्ता तथा तुनो में बनाए गए हैं। सभी क्रू सेंटर क्रियाशील कर दिए गए हैं।
शाम को की जा रही फायर ड्रिल
वन क्षेत्राधिकारी आर्यभट्ट ने बताया कि मोर घाटी रेंज से लेकर कालागढ़ रेंज की दक्षिणी सीमा अत्यंत ही संवेदनशील है। जनपद बिजनौर की उत्तरी क्षेत्र की आबादी इस सीमा से लगी हुई है। अक्सर पशुओं के चारे वैद्य लनी लकड़ी के लिए लोग वनों में प्रवेश कर जाते हैं। हालांकि वनों में यह प्रवेश अवैध माना जाता है। इसलिए शाम को हवा रुक जाने पर पत्तियों को जलाकर नष्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया को फायर ड्रिल कहते हैं। जंगल में आग का खतरा कम हो जाता है।