सीतामढ़ी। शुद्ध पानी हर व्यक्ति को मिलना चाहिए। आम जनता को शुद्ध पेयजल मुहैया हो इसके लिए व्यवस्था है कि समय-समय पर हैंडपंपों और अन्य पेयजल स्रोतों के पानी की जांच हो। इसके लिए कार्यदायी संस्था जल निगम को हैंडपंपों से निकलने वाले पानी की विधिवत जांच कराकर रिपोर्ट देनी चाहिए। लेकिन गंगा नदी से के किनारे वाले कोनिया क्षेत्र के दर्जन भर गांवों में पानी की जांच नहीं होती। ऐसे में यहां के लोगों को दुर्गंध वाला पानी पीना पड़ता है। आलम यह है कि इस इलाके में हैंडपंप से निकलने वाला पानी थोड़ी ही देर में मटमैला हो जाता है। उसमें से दुर्गंध भी आने लगती है। ग्रामीण कहते हैं कि पीने का मन तो नहीं करता, लेकिन गला तर करना है तो छानकर पीते ही हैं। ऐसे में पेट की बीमारी सहित अन्य बीमारियों के होने की आशंका बनी रहती है।
क्षेत्र के ग्रामीणों की मानें तो करीब एक दशक पहले क्षेत्र के हैंडपंपों से निकलने वाले पानी की हुई जांच में पता चला था कि आर्सेनिक है। उस समय वादे तो खूब हुए कि शुद्ध पानी के लिए तमाम योजनाएं चलायी जाएंगी। चलीं भी, लेकिन लोगों को ठोस समाधान नहीं मिला। अब तो कई साल से जांच तक नहीं होती। ग्रामीणों का कहना है कि जल निगम की ओर से समय-समय पर पेयजल की जांच कर पानी गुणवत्ता और दोष की जानकारी लोगों को अवगत कराना चाहिए। लेकिन बीते कई वर्षों से हैंडपंपों के पानी की जांच ही नहीं की गई, जिससे आम लोगों को यह भी पता नही है कि जिस पानी से वे प्यास बुझा रहे हैं उस पानी में किस तत्वों की कमी या अधिकता है।