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कहीं शौचालय अधूरा तो कुछ जगह पेयजल की गंभीर समस्या

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प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर चमकाने, सुविधाओं का विस्तार करने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प योजना शुरू की गई है। इसके तहत 19 पैरामीटर तय करके काम भी शुरू करा दिए गए, लेकिन जिले में मजबूत संकल्प के अभाव में काम नहीं होने के कारण कायाकल्प की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिले में कागज पर तो 98 से 99 फीसदी तक विद्यालयों में शौचालय की सुविधा है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। कहीं शौचालय चोक पड़ा है तो कहीं गंदगी का अंबार है। पेयजल और बाउंड्रीवाल की समस्या भी गंभीर है। बुधवार को जिले के सभी विकास खंडों में स्कूलों के कायाकल्प की हकीकत जानने के लिए पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
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प्राथमिक विद्यालय मसुधी में दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय तक नहीं है। पेयजल की व्यवस्था के लिए लगाई गई टोटी टूटी पड़ी है। सुरियावां के कंपोजिट स्कूल कौडर में सबमर्सिबल पंप का स्टार्टर जला पड़ा है। अन्य दिक्कतें भी हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि पहले से काफी सुधार हुआ है। जहां कमियां हैं, वहां सुविधाओं का विस्तार कर जल्द ही कमियां दूर करा ली जाएंगी। डीसी निर्माण शिवम सिंह का कहना है कि कायाकल्प योजना में 19 पैरामीटर के तहत 87 फीसदी स्कूलों में काम हो चुका है। शौचालय का निर्माण 98 फीसदी से ज्यादा विद्यालयों में हो चुका है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह का कहना है कि स्कूल बंद थे। इसलिए कार्य धीमी गति से हुए। अब रुके कार्यों में तेजी लाई जाएगी।
उधर, डीघ ब्लॉक के डीघ महादेवा स्थित स्कूल का शौचालय चोक है। यहां पेयजल के लिए परिसर में लगा हैंडपंप, सबमर्सिबल बीते अप्रैल माह से ही खराब है। बाउंड्रीवाल टूटी है और मेन गेट भी नहीं है। प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पानी पीने के लिए बच्चों को पास की बस्ती में जाना पड़ता है। प्रधान को समस्या से अवगत कराया गया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय अनेगपुर 2009 में बना है। यहां की हालत पहले जैसी ही है। यूरिनल में गंदगी का अंबार है। गंदगी के चलते उसके पास खड़ा होने लायक भी नहीं है। शौचालय की हालत भी पहले जैसी ही। टाइल्स आदि भी अब तक नही लग पाए हैं। पेयजल के लिए लगे दो हैंडपंपों में से एक खराब है। सुरियावां ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय छपरिया में लगे सबमर्सिबल पंप से पानी नहीं निकल रहा है। ऐसे में शौचालय में पानी की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है। शौचालय, हैंडवॉस सिस्टम बंद पड़ा है। एक साल पहले सबमर्सिबल पंप चोरी हो चुका है। यहां दिव्यांग शौचालय छह माह से बन रहा है, लेकिन अब तक अधूरा है। प्रधानाध्यापक अमित कुमार सिंह ने बताया कि समस्याओं के बारे में प्रधान को बताया गया है। पड़ताल के दौरान अन्य परिषदीय स्कूलों में कमोवेश व्यवस्था कुछ ठीक है। मोढ़ क्षेत्र के कोल्हुआ पांडेय के कंपोजिट विद्यालय चकदुखरन में 17 पैरामीटर पूर्ण हो चुके हैं। हैंडवॉस, शौचालय निर्माण आदि हो चुके हैं। कस्तूरीपुर में भी 16 पैरामीटर पूर्ण हैं। इसमें पेयजल, शौचालय, रंगाई, पुताई आदि की व्यवस्था की गई है। उच्च प्राथमिक एवं प्राथमिक विद्यालय नवधन में भी शौचालय व पेयजल की व्यवस्था अच्छी है।
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