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कहीं लटका रहा ताला, कहीं पढ़ते मिले बच्चे

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सीतामढ़ी/मोढ़। तीन दिनों से आंगनवाड़ी केंद्रो का संचालन शुरू हो गया है, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। बृहस्पतिवार को भी कई केंद्र बंद मिले जबकि जो केंद्र खुले थे वहां बच्चों की संख्या भी नाममात्र की रही। जिससे विभागीय तैयारी पर ही सवाल उठने लगे हैं।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में 1493 आंगनवाड़ी, मिनी आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं। कोरोना संक्रमण के कारण करीब 18 माह तक बंद रहे केंद्र चार अक्तूबर से खुल गए। सोमवार और बृहस्पतिवार को बच्चों की उपस्थिति होनी है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने डीघ ब्लॉक के नारेपार गांव में पांच केंद्रो की पड़ताल की। जिसमें प्रथम केंद्र में पंजीकृत 30 बच्चों में 21 उपस्थित रहे। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सीमा सिंह और सहायिका मीरा देवी बच्चों को पढ़ाती मिलीं। प्राथमिक विद्यालय नारेपार और सीतामढ़ी में संचालित दो-दो केंद्रों पर पंजीकृत 40-50 बच्चों में मात्र छह-सात ही दिखे। सीमावर्ती कोनिया क्षेत्र के गांव के आंगनवाड़ी केंद्र की हालत ठीक नहीं रही। अधिकतर केंद्रों पर ताला लटका रहा।
मोढ़ संवाददाता के अनुसार, सुरियावां ब्लॉक के चकचंदा गांव में आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लटका मिला। यहां पर न तो कार्यकर्ता दिखीं और न ही सहायिका। ग्रामीण जगदीश कुमार, संतोष, रामआसरे ने बताया कि केंद्र अक्सर बंद ही रहता है। महीने में कभी कभार केंद्र खुलता है। सरकार से मिलने वाली सुविधाएं भी कभी कभार दिया जाता है। डीपीओ मंजू वर्मा ने कहा कि सभी सीडीपीओ और सुपरवाइजर को निर्देश दिया गया है कि वह अपने क्षेत्र में भ्रमण कर केंद्रों का संचालन दुरुस्त कराएं।
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