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झांसा देकर शिक्षिका से दुष्कर्म मामले में पुर्नविवेचना का आदेश

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शादी का झांसा देकर एक शिक्षिका का आठ साल तक यौन शोषण करने के मामले में एसीजेएम सौम्या पांडेय की अदालत ने शुक्रवार को फिर से विवेचना करने का आदेश देते हुए तत्कालीन कोतवाली प्रभारी औराई केके सिंह को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने यह आदेश 164 के बयान और वीडियो के आधार पर दिया है।
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अधिवक्ता नंदलाल शुक्ला के मुताबिक जिले के औराई थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका ने 28 अप्रैल 2019 को इस आरोप के साथ एक मुकदमा दर्ज कराया था कि वर्ष 2011 से उसी क्षेत्र के कालीन कारोबारी वाजिद अली से उसका संबंध हुआ। वाजिद शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाता रहा। इस दौरान वह दो बार गर्भवती हुई तो आरोपी ने गर्भपात करा दिया। 22 अप्रैल 2019 को उसे घर में घुसकर धमकाया गया। शिक्षिका की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। हालांकि आरोपी ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली। कुछ महीने बाद पीड़िता पक्ष ने याचिका देकर अग्रिम जमानत रद्द करवाने में सफलता पाई।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी के खिलाफ दो जनवरी 2021 को गैर जमानती वारंट जारी किया था। पांच जनवरी को आरोपी ने अदालत में समर्पण किया। उसके बाद जेल भेजा गया। औराई थाने की पुलिस मामले में लगातार संदिग्ध बनी रही। पुलिस ने मामले की विवेचना कर चार्जशीट लगा दी। इसको लेकर पीड़िता ने कोर्ट में फिर से विवेचना के लिए याचिका दाखिल किया। इसमें आरोप लगाया कि मुकदमा दर्ज करने के समय औराई थाना और खमरिया चौकी पुलिस आरोपी को अग्रिम जमानत दिलाने में भूमिका निभाई। घर के चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाकर हर समय उस पर निगरानी रखी गई। जब भी पिता के साथ कोर्ट या कहीं जाती है तो कई लोग जिसमें कुछ सफेदपोश नेता भी गाड़ी से पीछे लग जाते हैं। पीड़िता के 164 यानी कलमबंद बयान और वीडियो को संज्ञान में लेते हुए एसीजेएम सौम्या पांडेय ने पुनर्विवेचना का आदेश दिया। प्रकरण में लापरवाही बरतने पर तत्कालीन कोतवाली निरीक्षक केके सिंह को कड़ी फटकार लगाई।
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