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खरीफ सीजन में सिर्फ 858 किसानों को मिला मुआवजा

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आपदा से फसल नष्ट होने पर किसानों को मुआवजा देने की व्यवस्था है लेकिन इसका अपेक्षित लाभ किसानों को नहीं मिलता है। खरीफ सीजन में फसल नष्ट होने पर सिर्फ 858 किसानों को ही मुआवजा मिला था। किसानों का आरोप है कि नुकसान होने पर उचित मुआवजा नहीं मिलता। पिछले दिनों तेज हवा के साथ हुई बारिश से नष्ट हुई धान की फसल का भी उचित मुआवजा मिलने की उम्मीद कम है।
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दैवी आपदा से नष्ट हुई फसल की भरपाई के लिए किसानों को प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति दी जाती है, लेकिन मुआवजे का आधा अधूरा पैसा मिलने से किसानों के सामने घर का खर्च चलाना भारी पड़ रहा है। किसान कहते हैं कि उचित मुआवजे की आस पर बीमा कंपनी पानी फेर देती है। फसली बीमा कराने के लिए किसानों को उत्साहित किया जाता है। बाहरी आमदनी नहीं होने से अधिकतर किसान कृषि पर निर्भर हैं। जो फसल तैयार करते हैं उसी से घर का खर्च चलाते हैं। वहीं फसल जब दैवी आपदा में नष्ट हो जाती है तब उनके लिए खाने के अलावा अन्य खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। पिछले दिनों हुई बारिश से धान, मक्के, उड़द की तैयार फसल पानी में डूब नष्ट हो गई थी। इससे काफी नुकसान हु्आ था। इसकी भरपाई के लिए कुछ किसानों को क्षतिपूर्ति दी गई लेकिन वे भी आधे अधूरे हैं। जो किसान केसीसी लिए रहते हैं उनका बैंक फसली बीमा कर देता लेकिन जब किसान बीमा करवा लेता है तो क्लेम करने पर उसको या तो नहीं मिलता या मिलता है तो बहुत ही कम धनराशि दी जाती है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2021 में पांच हजार से ज्यादा लोगों ने फसल बीमा कराया था। कृषक अंश, राज्य व केंद्र अंश मिलाकर बीमा कंपनी को एक करोड़ 96 लाख मिले थे लेकिन जब क्लेम देना हुआ तो महज 858 किसानों को ही मिला। किसान श्यामधर सिंह, होरी लाल यादव, मल्लू, राम बिंद राधेश्याम, आदि किसानों ने शासन से क्षतिपूर्ति की पूरी रकम कंपनी से दिलवाने की मांग की है।
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प्रतिक्रिया---
धान की खेती की था लेकिन असमय बारिश फसल चौपट हो गई । बीमा में 26 हजार मिलना चाहिए लेकिन 3961 रुपये मिले। इससे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।- श्यामधर पांडेय, नवधन
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एक एकड़ में धान की खेती की था लेकिन बारिश के चलते डूबने से फसल नष्ट हो गई। 14 हजार क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए थी, लेकिन 2200 ही मिले है। खेती से ही घर का खर्च चलता है। कंपनी को तो पैसा मिल जाता है लाभार्थियों को देने लिए बहाना किया जाता है। - अखिलेश उपाध्याय, नवधन
वर्जन---
पिछले दिनों हुई बारिश के बाद कुछ किसानों ने क्षतिपूर्ति के लिए कृषि विभाग में प्रार्थनापत्र दिया है। उनका सर्वे कराया जाएगा। नियमानुसार सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाएगा। पहले भी दिया गया है। जहां जितने फीसदी का नुकसान होता है वहां उसी के अनुसार मुआवजा दिया जाता है। -आशीष पांडेय, जिला समन्वयक- बीमा कंपनी
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