होली त्योहार की खुमारी अब धीरे-धीरे कम होने लगी है। मुंबई सहित विभिन्न शहरों से अपने घर आए लोग अब परदेश लौटने लगे हैं। रेलवे स्टेशन से लेकर रोडवेज, निजी बस, आटो स्टैंड तक यात्रियों से गुलजार रहे। मार्च के समापन तक प्रमुख ट्रेनें फुल होने की स्थिति में तत्काल टिकट ही वैकल्पिक सहारा रह गया है। हाईवे समेत अन्य सहायक मार्गों से यात्री ऑटो पकड़ कर स्टैंड पहुंचे। जहां से प्रयागराज-वाराणसी की ओर रफ्तार भर रही रोडवेज की बसों को हाथ देकर रोकते दिखाई पड़े।
पूर्वोत्तर रेलवे के ज्ञानपुररोड स्टेशन पर मुंबई, दिल्ली, सूरत आदि महानगरों की यात्रा के लिए टिकट लेने आने आए यात्री रमेश कुमार, मोहनलाल, बिरजू, शिवचंद आदि ने बताया कि होली त्योहार पर वे परिवार के साथ घर आए थे। निजी क्षेत्र में कार्यरत होने के कारण मात्र छह दिन की छुट्टी मिलने से तीन दिन का समय व्यतीत हो चुका है। अब जीविकोपार्जन वाले स्थान पर पहुंचने की चिंता है। वाणिज्य अधीक्षक केके राय ने बताया कि माधोसिंह-प्रयागराज रेलखंड से चलने वाली प्रमुख ट्रेनें मार्च के अंतिम तक फुल हो चुकी हैं। अनारक्षित कोच और एक-दूसरे के सीटों का सहारा लेकर यात्रा करने वाले वेटिंग टिकट भी नहीं छोड़ रहे हैं, जबकि इस रेलखंड के साथ उत्तर रेलवे जंघई-वाराणसी रूट पर भी कई अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन रेल प्रशासन करा रहा है। उधर, दुर्गागंज-ज्ञानपुर से ऑटो पकड़ कर बस स्टैंड गोपीगंज पहुंचे त्रिभुवन, मनोहरलाल, शिवचारी ने बताया कि कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद के लिए वह निकले हैं। शनिवार तक खाली जाने वाली रोडवेज की बसों में भी जगह नहीं होने के चलते चालक-परिचालक रोकने से हिचकते रहे। एआरएम वाराणसी डीएस सिंह ने कहा कि 22 मार्च तक अतिरिक्त फेरा लगाने वाली बसों में यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। तीन दिन बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी।