स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर गांव, हर घर में शौचालय बनवाकर लोगों को खुले में शौच जाने से रोकना था। मगर जिम्मेदारों की लापरवाही और लोगों में जागरूकता की कमी के चलते शौचालयों में उपले, भूसा और करकट रखे गए हैं। इससे स्वच्छता अभियान को पलीता लग रहा है। लोग खुले में शौच जा रहे हैं और निगरानी समितियां भी काम नहीं कर रही हैं।
जिले की करीब 16 लाख आबादी है। जिला पंचायत राज विभाग के अनुसार, अब तक जितने लाभार्थियों का चयन किया था उसमें करीब 2.79 लाख शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। इसमें जिले के डीघ और अभोली ब्लाक के कई ग्राम पंचायतों में स्थिति खराब है। कहीं शौचालय में भूसा, उपली तो कहीं करकट रखा है। कई जगहों पर तो निर्माण भी पूरा नहीं हो सका है।
डीघ ब्लाक के हरिरामपुर गांव में सुनीता पाल का शौचालय तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। टंकी तक नहीं बनी है। यहीं के कन्हैया लाल का शौचालय खराब हो चुका है। कभी उपयोग नहीं हुआ। कजधरपुर में कुंता देवी का शौचालय भी बंद है। इसी तरह कूड़ी कला भटगवां में स्थिति खराब है। सोनपुर गांव में राजेंद्र यादव के शौचालय में तो छत ही नहीं है। वहीं अभोली ब्लाक के ख्योखर में तो किसी के शौचालय में करकट रखा है तो किसी में उपले रखे गए हैं। यहां की दलित बस्ती में भुल्लन, अलगू आदि लोगों के शौचालय उपयोग के लायक नहीं है।