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चिकित्सक की रिपोर्ट के बगैर नहीं होगा एंबुलेंस का फिटनेस

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एंबुलेंस की फिटनेस सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के कार्यालय में अभी तक विभाग के लोग ही करते थे। आमतौर पर संभागीय निरीक्षक द्वारा एंबुलेंस की जांच की जाती रही है। उसी के आधार पर फिटनेस रिपोर्ट तैयार होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। डॉक्टर की जांच रिपोर्ट के बगैर एंबुलेंस का फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं बनेगा। इस संबंध में जिले के परिवहन विभाग के पास विभागीय मुख्यालय का पत्र भी आ चुका है। शासन स्तर से आए निर्देश के बाद विभाग ने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है।
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एआरटीओ कार्यालय में इस समय कुल 42 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनका संचालन विभिन्न सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से किया जाता है। संकट के समय में लोगों का जीवन बचाने में ये एंबुलेंस काफी मददगार होते हैं, लेकिन कई बार फिटनेस नहीं होने के कारण लोगों की जान तक चली जाती है। परिवहन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि आमतौर पर जब आरआई द्वारा फिटनेस किया जाता है तो वह केवल वाहन का फिटनेस देखता है। एंबुलेंस में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए, इसकी जांच नहीं होती थी। ऐसे में कई बार समस्या बढ़ जाती है। अब शासन ने यह तय कर दिया है कि एंबुलेंस के फिटनेस जांच के लिए जो पैनल होगा, उसमें सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, संभागीय निरीक्षक के अलावा मुख्य चिकित्साधिकारी के स्तर से नामित एक चिकित्सक भी शामिल होगा। जब तक तीनों की रिपोर्ट नहीं लगेगी, तब तक फिटनेस नहीं होगा।
संभागीय निरीक्षक प्रमेंद्र ने बताया कि शासन स्तर से जो पत्र जारी किया गया है, उसमें चार प्रकार के एंबुलेंस के फिटनेस से जुड़ी चेकलिस्ट दी गई है। इसमें ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता, स्ट्रेचर सहित अन्य संसाधनों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें मैन पॉवर सहित कुल 34 बिंदुओं की पड़ताल कर रिपोर्ट तैयार की जानी है। एआरटीओ अरुण कुमार का कहना है कि एंबुलेंस का फिटनेस कराने के लिए अब चिकित्सक की रिपोर्ट भी जरूरी है। इसलिए मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया है। इसके लिए उन्हीं के स्तर से एक चिकित्सक को नामित किया जाना है।
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