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कुष्ठ रोग के 17 नए मरीज मिले

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कुष्ठ उन्मूलन मिशन कालीन नगरी में कागजों पर चल रहा है। पिपरिस स्थित कुष्ठ आश्रम को छोड़ दिया जाए तो विभाग न तो दवाओं का वितरण करता है और न ही जरूरी जांच कराता है। इससे कुष्ठ रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। मात्र दो महीने में 17 मरीज मिलने से विभागीय कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में हैं।
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कुष्ठ रोग पर नियंत्रण के लिए सरकार कई साल से अभियान चला रही है। अस्पतालों में नि:शुल्क दवाएं देने से लेकर लोगों को जागरूक भी किया जाता है। प्रोत्साहन स्वरूप मरीजों को आर्थिक मदद भी दी जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता से कुष्ठ रोगियों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। मात्र दो महीने में ही 17 नए मरीज मिल चुके हैं, जबकि अभी कोई विशेष अभियान नहीं चला है। अप्रैल में 10 और मई माह में सात मरीज मिले हैं। इनका उपचार चल रहा है। जो नए मरीज मिले हैं, उनमें दिव्यांगता और व्यापकता दर जीरो फीसदी है। इस तरह से नए व पुराने मरीजों को मिलाकर कुल 63 का उपचार चल रहा है। जिला कुष्ठ परार्मशदाता डॉ. विनोद मिश्र का कहना है कि यदि बीमारी का समय पर उपचार नहीं कराया गया तो घातक बीमारी का रूप ले सकती है। कुष्ठ रोग विभाग के फिजियोथिरेपिष्ट मनोज तिवारी और रामचंद्र मौर्य ने बताया कि कुष्ठ रोग से पीड़ित मरीजों का उपचार लंबा चलता है। छह महीने से लेकर एक साल तक उन्हें दवाएं देकर बीमारी खत्म करने की कोशिश की जाती है।
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