केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि यूपी में मुलायम को सबक सिखाने के लिए वह केंद्रीय मंत्री पद की कुरबानी देने को भी तैयार हैं।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुलायम यूपी में कांग्रेस को ताकतवर होते नहीं देख सकते। 1998 में सोनिया गांधी से वादा करने के बाद भी मुलायम ने कांग्रेस की सरकार नहीं बनने दी थी।
उन्होंने मुलायम और भाजपा के रिश्तों की चर्चा करते हुए कहा कि जया जेटली के आवास पर आडवाणी व मुलायम सिंह के बीच एक समझौता वार्ता हुई थी।
इसके बाद ही 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनाने में मुलायम ने सहयोग किया था, जिसका ईनाम 2003 में भाजपा ने मुलायम की सरकार बनवाकर दिया और 135 विधायकों के जरिए बहुमत साबित कराया गया।
गोधरा कांड के बाद गुजरात चुनाव में भाजपा के प्रमोद महाजन के कहने पर पांच हजार मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में सपा के उम्मीदवार उतारने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह मोदी की सरकार बनाने में मुलायम ने मदद की। उन्होंने कहा कि हम सपा से निकलना नहीं चाहते थे परन्तु हमें मजबूर किया गया क्योंकि हम सच्चाई का साथ देते हैं।
अपने बेटे राकेश वर्मा के चुनाव हारने पर मुलायम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बेनी ने कहा कि राकेश की जमानत जब्त हो गई थी, लेकिन उन्हें यह ध्यान नहीं है कि डिम्पल भी चुनाव हारी थीं।
बेनी ने कहा कि मैंने तय किया था कि अब मैं कुछ नहीं बोलूंगा, लेकिन वे लगातार मेरे और मेरे परिवार के बारे में बोल रहे हैं। उन्हें यह ध्यान नहीं है कि 58 हजार वोट पाने वाले की जमानत कैसे जब्त हो गई।
केंद्रीय इस्पात मंत्री ने कहा कि अगर मोती लाल वोरा राज्यपाल नहीं होते तो गेस्ट हाउस कांड में यह लोग मायावती की हत्या करा देते।
आगामी लोकसभा चुनाव में बसपा को अधिक सीटें मिलने का आकलन पेश करने पर जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वे बसपा में जा सकते हैं तो उन्होंने कहा कि उस पार्टी में तो उनका दम घुट जाएगा।