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शारदीय नवरात्रि कल से, आठ दिन होगी भगवती की आराधना 17-02-32

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शारदीय नवरात्रि कल से, आठ दिन होगी भगवती की आराधना
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- चतुर्थी, पंचमी तिथि एक ही दिन पड़ने से आठ दिन की नवरात्रि
- 15 अक्तूबर को मनाई जाएगी विजय दशमी
- शनिवार को पड़ रही है तृतीश व चतुर्थी तिथि
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सर्वपितृ अमावस्या पर पितृ विसर्जन के साथ बुधवार को श्राद्ध समाप्त हो जाएगा। इसके अगले दिन अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी बृहस्पतिवार से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी। इस बार चतुर्थी और पंचमी तिथि के एक साथ पड़ने की वजह से इस बार आठ दिन की नवरात्रि होगी, जो सात अक्तूबर से शुरू होकर 14 अक्तूबर तक रहेगी। 15 अक्टूबर को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य मोहित मिश्र के अनुसार एक ही दिन में दो तिथियां पड़ने से शारदीय नवरात्रि आठ दिन का होगा। जिसमें नौ अक्तूबर दिन शनिवार को तृतीया सुबह सात बजकर 48 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन 10 अक्तूबर दिन रविवार को सुबह पांच बजे तक रहेगी। अर्थात शनिवार को तृतीया व चतुर्थी दोनों का योग है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार देवी मां के पूजन की शुरुआत चित्रा नक्षत्र में बृहस्पतिवार के दिन से हो रही है, जो पूजा व आध्यात्मिक उन्नति के साथ ही साहस व साधना लिए शुभ है।
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घट स्थापना मुहूर्त
अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर सात अक्तूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह छह बजकर 17 मिनट से सुबह सात बजकर सात मिनट तक का है। इसके अलावा सुबह 09.33 से 11.31 बजे तक और दोपहर 03.33 से शाम 05.05 के बीच भी घट स्थापना की जा सकेगी।
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शारदीय नवरात्रि की तिथियां
- पहला दिन 07 सात अक्तूबर 2021: मां शैलपुत्री की पूजा
- दूसरा दिन 08 अक्तूबर 2021: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
- तीसरा दिन 09 अक्तूबर 2021: मां चंद्रघंटा व मां कुष्मांडा की पूजा
- चौथा दिन 10 अक्तूबर 2021: मां स्कंदमाता की पूजा
- पांचवां दिन 11 अक्तूबर 2021: मां कात्यायनी की पूजा
- छठवां दिन 12 अक्तूबर 2021: मां कालरात्रि की पूजा
- सातवां दिन 13 अक्तूबर 2021: मां महागौरी की पूजा
- आठवां दिन 14 अक्तूबर 2021: मां सिद्धिदात्री की पूजा
- 15 अक्तूबर 2021: विजयादशमी (दशहरा)
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पितृ विसर्जन आज
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या कहते हैं। यह पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है। इसे पितृ विसर्जन अमावस्या के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि 15 दिन से धरती पर आए हुए पितर अमावस्या के दिन विदा होते हैं। इस दिन पितरों को निमित करने के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। दान-दक्षिणा के साथ उन्हें विदा किया जाता है।
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