व्यवसायी पुत्र राहुल मद्धेशिया अपहरण कांड में आरोपी पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के खिलाफ कुर्की के आदेश पर अमल करने के प्रयास में नई टीम जुट गई है। सबसे पहले टीम पूर्व मंत्री अमरमणि की संपत्तियों का ब्योरा जुटाएगी। कोतवाल विनय कुमार पाठक ने बताया कि न्यायालय के आदेश के क्रम में गठित विशेष टीम ने अपना काम शुरू कर दिया है। अगली तारीख 20 दिसंबर से पहले कुर्की की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
इससे पहले न्यायालय के आदेश पर पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी के लिए एसपी स्तर से पुलिस टीम का गठन किया गया था, लेकिन टीम कुछ नहीं कर पाई। इसके बाद न्यायालय ने कड़ी फटकार लगाते हुए कोतवाल को तलब कर लिया था। दो दिसंबर को दूसरी टीम का गठन करके कुर्की कर 20 दिसंबर तक अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद बुधवार को एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने कोतवाली के अतिरिक्त निरीक्षक कृपाशंकर मौर्य, क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संजय कुमार, एसओ महिला थाना निधि यादव, एसओजी प्रभारी, स्वाॅट प्रभारी और चौकी इंचार्ज सिविल लाइंस को नई टीम में रखा गया है। टीम के पर्यवेक्षण का जिम्मा सीओ सिटी विनय चौहान को सौंपा गया है।
बता दें कि कुर्की की नोटिस के बावजूद दो दिसंबर को आरोपी अमरमणि त्रिपाठी के न्यायालय में हाजिर न होने की दशा में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम/विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) प्रमोद कुमार गिरि ने सीआरपीसी-83 के तहत संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है।
यह है मामला
छह दिसंबर 2001 को व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। इस मामले में कोतवाली थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया गया था। पुलिस ने इस मामले में अमरमणि समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया था। आरोप है कि लखनऊ के जिस मकान से अपहृत बालक मिला था, वह तत्कालीन मंत्री अमरमणि का था। अमरमणि के खिलाफ 24 अक्तूबर 2011 से गैर जमानती वारंट जारी है। तीन नवंबर 2023 को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने बस्ती कोतवाली पुलिस को सीआरपीसी-82 की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। 16 नवंबर की सुनवाई में पुलिस ने सीआरपीसी-82 की कार्रवाई से कोर्ट को अवगत कराया, लेकिन न्यायाधीश ने खारिज करते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली के विरुद्ध कार्य में शिथिलता व लापरवाही का प्रकीर्णवाद दर्ज कर दो दिसंबर को तलब किया था।
पुलिस की कार्यप्रणाली से न्यायालय खफा
इस केस में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर न्यायालय कई बार असंतोष जाहिर कर चुका है। एसपी बस्ती और कोतवाली पुलिस के खिलाफ तल्ख टिप्पणी कर चुकी है। न्यायालय की नाराजगी इसलिए ज्यादा है कि 22 वर्ष पुराने मामले में पुलिस एक बार भी अमरमणि समेत तीन आरोपियों को अदालत के सामने पेश नहीं कर पाई। जबकि कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में वह 20 वर्ष तक उम्रकैद की सजा काट कर पांच महीने पहले ही 24 अगस्त को रिहा हुआ है।