महिला अधिकारी के आवास में घुसकर दुष्कर्म की कोशिश, हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में जेल भेजे गए निलंबित नायब तहसीलदार घनश्याम की न्यायिक रिमांड की अवधि पूरी होने पर शुक्रवार को सीजेएम न्यायालय में पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि उसकी न्यायिक अभिरक्षा की अवधि बढ़ाकर फिर जेल भेज दिया जाएगा। मंगलवार को जनपद न्यायाधीश की अदालत में जमानत की अर्जी भी दाखिल की गई है। इस पर जनपद न्यायाधीश कुलदीप सक्सेना ने 11 दिसंबर को सुनवाई की तारीख तय की है।
27 नवंबर को पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया था, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। आठ दिसंबर को न्यायालय ने पेशी की तारीख तय की थी।
जानकारी के अनुसार, 16 नवंबर को तहसील में तैनात एक महिला अधिकारी ने तहरीर देकर तत्कालीन नायब तहसीलदार घनश्याम शुक्ल पर 11-12 नवंबर की रात सरकारी आवास में जबरदस्ती घुसकर दुष्कर्म की कोशिश, गला दबाकर हत्या का प्रयास, मारपीट, अपशब्द कहने का आरोप लगाया था। 17 नवंबर को पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया। 21 नवंबर को राजस्व परिषद ने आरोपी घनश्याम शुक्ल को निलंबित कर कानपुर कमिश्नर कार्यालय से संबद्ध कर दिया था। साथ ही, लखनऊ की कमिश्नर को जांच सौंपी थी। इधर, विवेचक के प्रार्थनापत्र पर न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी हुआ। गिरफ्तारी के लिए छह टीमों का गठन किया गया। एक दिन बाद ही एसपी की तरफ से उसकी गिरफ्तारी करने वाले को 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की गई थी। 27 नवंबर को नाटकीय ढंग से पुलिस ने उसे गिरफ्तार न्यायालय में पेश किया था।
एक बार खारिज हो चुकी है जमानत अर्जी
28 नवंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में आरोपी घनश्याम शुक्ल की जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। सुनवाई के बाद प्रभारी सीजेएम /एसीजेएम फर्स्ट उमेश यादव ने अर्जी खारिज कर दी। अर्जी में लिखा गया था कि वह पूरी तरह से निर्दोष है। उसके शत्रुओं ने भविष्य बर्बाद करने के लिए साजिश के तहत फंसाया है। पुलिस ने पक्षपात पूर्ण ढंग से आरोपी बनाकर जेल भेजा है। उसने खुद ही कोतवाली में आत्मसमर्पण किया। वह मामले की विवेचना-विचारण में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। जमानत अर्जी में दी गई दलीलों के विरोध में सहायक अभियोजन अधिकारी सुधीर स्वरूप ने न्यायालय को बताया कि आरोपी घनश्याम पर गंभीर अपराध करने का आरोप है। उसके खिलाफ विवेचक ने तमाम साक्ष्य और बयान एकत्र किए गए हैं। आरोपी की जमानत होने पर वह विवेचना-जांच को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जमानत अर्जी खारिज कर दी जाए। इस पर न्यायालय ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था।