संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। रेलवे के आरक्षण काउंटर पर एक्सप्रेस एवं सुपरफास्ट ट्रेनों में तत्काल टिकट निकालना आम यात्रियों के लिए कठिन हैं। इसके लिए काउंटर पर लाइन लगाने के बाद भी तत्काल टिकट नहीं मिल पा रहा है।
अक्सर दो से चार टिकट निकलने के बाद आम यात्रियों को सर्वर डाउन होने की जानकारी देकर निराश कर दिया जा रहा है। जानकार बताते हैं टिकट के अवैध धंधेबाज तत्काल टिकट निकलने के समय साइट हैक कर लेते हैं और अपने निजी आईडी से टिकट निकाल लेते हैं।
ऐसे में जिन यात्रियों को दो-तीन दिन के भीतर मुंबई-दिल्ली तक की यात्रा करनी होती हैं वह धंधेबाजों के संपर्क में आकर अतिरिक्त रकम दे देते हैं। इसके बाद धंधेबाज गारंटी के साथ एक से दो दिन में टिकट देने का वादा करते हैं।
जिले में फर्जी आईडी पर कंफर्म रेल टिकट का धंधा खूब चल रहा है। दलाल मुंबई-दिल्ली तक की यात्रा के लिए कंफर्म टिकट तुरंत दे रहे हैं। इसके बदले अच्छी खासी रकम वसूल की जा रही है। यह धंधा शहर से लेकर कस्बों और गांवों तक फैला हुआ है। रेल टिकट के लिए क्षेत्रवार दलालों का चेहरा चर्चित है।
लोगों को ट्रेन से लंबा सफर करने के लिए स्टेशन नहीं आना पड़ रहा है। क्षेत्रीय दलाल के संपर्क में आने के बाद टिकट की समस्या का हल निकल जा रहा है। इससे रेलवे को राजस्व का चूना लग रहा है और यात्रियों की जेब ढीली हो रही है। बस उन्हें सुकून इस बात का है कि टिकट के लिए दौड़भाग नहीं करनी पड़ती है।
इंटरनेट की दुनिया में नए उम्र के लोग साइबर अपराध को कमाई का जरिया बना रहे हैं। रेलवे की आईआरसीटीसी साइट भी इसी का शिकार बन गई है। इस साइट पर अलग-अलग नाम की फर्जी आईडी रजिस्टर्ड कर रेलवे टिकट का अवैध धंधा किया जा रहा है।
आरपीएफ, सीबीआई की साइबर टीम अंकुश लगाने के लिए गांवों और कस्बों में छापे मार रही है। मगर, कार्रवाई उन्हीं पर हो पा रही है जिनका धंधा व्यापक है। ऐसे कुछ गिने चुने धंधेबाज ही आरपीएफ की पकड़ में आ पाते हैं। बाकी तक रेलवे का खुफिया तंत्र भी नहीं पहुंच पा रहा है।
बस्ती, सिद्धार्थनगर और गोंडा जनपद के सीमावर्ती कस्बों में इस तरह के धंधे ने जोर पकड़ लिया है। बस्ती-संतकबीरनगर सीमा क्षेत्र के बाघनगर, सेमरियावां, रुधौली, सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज, बेवा, पथरा बाजार और गोंडा जनपद के बभनान, खोड़ारे, गौरा चौकी आदि क्षेत्रों में ई-टिकट सेंटर का नाम देकर फर्जी आईडी से कंफर्म टिकट निकालने का खेल चल रहा है।
यही वजह है कि सहालग और त्योहारी सीजन में पूर्वांचल होकर गुजरने वाली ट्रेनों में नो रूम की समस्या बढ़ जाती है। इन धंधेबाजों का संजाल इस कदर फैला है कि जरिये फोन े इनके यहां दिल्ली-मुंबई, गुजरात तक से अगले तीन से चार माह तक के टिकट की बुकिंग का सौंदा हो रहा है।
धंधेबाज आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर 15 से 20 फर्जी आईडी रजिस्टर्ड कराकर प्रतिदिन 10 से 15 टिकट निकाल ले रहे हैं। रेलवे के काउंटर पर पहुंचने के बाद लोगों को एक से दो महीने बाद की तिथि में भी वेटिंग टिकट मिल पा रहा है।
मालवीय आवास पर धरना देते बौद्ध भिक्षु। संवाद
मालवीय आवास पर धरना देते बौद्ध भिक्षु। संवाद
मालवीय आवास पर धरना देते बौद्ध भिक्षु। संवाद
मालवीय आवास पर धरना देते बौद्ध भिक्षु। संवाद
मालवीय आवास पर धरना देते बौद्ध भिक्षु। संवाद
मालवीय आवास पर धरना देते बौद्ध भिक्षु। संवाद
मालवीय आवास पर धरना देते बौद्ध भिक्षु। संवाद