बस्ती। महिलाओं को ममता, करुणा और संवेदना की मिसाल माना जाता है। वहीं, यशवंत हत्याकांड की कहानी ने इस धारणा के ठीक उलट तस्वीर पेश की है। पुलिस के अनुसार, यशवंत की हत्या के बाद आरोपी रीमा करीब 20-25 किलोमीटर तक उसकी लाश पकड़े बाइक पर बैठी रही। रात के सन्नाटे में शव उसके साथ था, फिर भी उसका कलेजा नहीं कांपा। ये कहानी सुनकर हर किसी के रौंगटे खड़े हो गए।
यशवंत को उसकी प्रेमिका गुड़िया ने मिलने के लिए बुलाया था। पुलिस जांच के मुताबिक, इसके बाद घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि यशवंत की जान चली गई। मामले में गुड़िया, उसकी मौसेरी बहन रीमा, सोना देवी और शीला की भूमिका सामने आई है। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने में रीमा के प्रेमी रामललित चौधरी की भूमिका भी अहम रही।
पुलिस के अनुसार, यशवंत की मौत के बाद रीमा प्रेमी रामललित चौधरी बाइक चलाकर शव को ठिकाने लगाने निकला। रीमा पीछे बैठी थी और यशवंत की लाश को पकड़े रही और रात के अंधेरे में यह सफर चलता रहा। यह दृश्य ही इस हत्याकांड को और झकझोरने वाला बना देता है। दोनों धमौरा की ओर पहुंचे और नहर के पास सड़क किनारे शव छोड़ दिया।
पुलिस की गश्त पर भी उठे सवाल
घटना के बाद पुलिस की गश्त प्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं। दो लोग बाइक से शव ढोते हुए एक थाने से दूसरे थाने की दहलीज में प्रवेश कर गए। इसके बाद तीसरे थाना क्षेत्र में बाइक पहुंचा दी, लेकिन पुलिस को रात में इसकी भनक न लगना, लचर निगरानी प्रणाली के संकेत देता है।