रामकुमार की दोहरी बातों से उलझी जांच
पांच माह बाद पुलिस को अपहरण की सूचना देने पर उठ रहे सवाल
सपा विधायक ने जबरदस्ती रखने से किया इनकार, बोले-खुद आए थे
बस्ती। बहादुरपुर के ब्लॉक प्रमुख रामकुमार की दोहरी बातों से अपहरण व बंधक बनाने की कहानी उलझ गई है। सवाल यह है कि अगर उन्हें पांच माह तक बंधक बनाकर रखा गया, तो पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई? इसी तरह, शुक्रवार को सपा विधायक महेंद्रनाथ यादव के घर से पुलिस के निकालने के बाद रामकुमार का अपनी मर्जी से आने की बात कहना भी अविश्वसनीय लग रही है।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बहादुरपुर ब्लॉक प्रमुख सीट के लिए सपा की तरफ से महेंद्रनाथ यादव ने अपने पक्ष के प्रत्याशी को चुनाव के मैदान में उतारा था। वहीं, भाजपा की तरफ से रामकुमार को उम्मीदवार बनाया गया था। काफी जोर लगाने के बावजूद सपा समर्थित प्रत्याशी जीत नहीं सका और भाजपा समर्थित रामकुमार ब्लॉक प्रमुख बन गए। सूत्रों का कहना है कि रामकुमार की जीत में कई दिग्गज भाजपाइयों ने जोर लगाया था। उनका दबाव झेल पाने में असमर्थ पाने पर रामकुमार ने पाला बदल लिया और सपा के खेमे में जा पहुंचे। इससे उन्हें जितवाने वाले भाजपाई तिलमिलाकर गए, लेकिन रामकुमार से संपर्क नहीं हो पाने से कुछ कर नहीं पाए। इसी बीच रामकुमार सपा मुखिया अखिलेश यादव से मिलकर सपा की सदस्यता ले ली और महेंद्रनाथ यादव को ब्लॉक का कामकाज देखने के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया। सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद कहानी बदल गई। बीते शुक्रवार को रामुकमार के साले ओमप्रकाश ने कलवारी थाने में तहरीर दे दी कि उनके जीजा को सपा विधायक ने बंधक बनाकर रखा है। इसके बाद पुलिस ने रामकुमार को सपा विधायक महेंद्रनाथ यादव के घर से बरामद करके उनके घर पहुंचा दिया।
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पुलिस ने तहरीर और तात्कालिक सूचना के आधार पर कार्रवाई की और ब्लॉक प्रमुख व उनके परिवार वालों को उनके गांव ले गई। सोमवार को न्यायालय में वादी और ब्लॉक प्रमुख का बयान होना है। इसके बाद पुलिस आगे की रणनीति बनाएगी।
- आशीष श्रीवास्तव, एसपी
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रामकुमार खुद आए थे : विधायक
पूरे प्रकरण में सदर विधायक महेंद्रनाथ यादव पल्ला झाड़ रहे हैं। उनका कहना है कि रामकुमार खुद चलकर उनके पास आए थे। अगर वह जाने के लिए कहते तो उन्हें ससम्मान भेजा गया होता। जबरदस्ती रखने का सवाल ही नहीं उठता।
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घर आने नहीं दिया जा रहा था : रामकुमार
ब्लॉक प्रमुख रामकुमार का कहना है कि वह अपनी मर्जी से महेंद्रनाथ यादव के पास गए थे, लेकिन बाद में उन्हें जबरदस्ती रखा गया। वह उनके घर से आना चाहते थे, लेकिन आने नहीं दिया जा रहा था।