हौसलों के पंख से बेटियों ने छुआ आसमान
राष्ट्रीय बालिका दिवस आज
बस्ती। जीवन में ऊंची उड़ान के लिए पंख नहीं हौसला चाहिए। इन्हीं हौसलों के पंख से जिले की तमाम बेटियों ने आसमान छूने के प्रयास को साकार किया। इन बेटियों ने अपने दम पर खेल में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैदान में अपनी प्रतिभा बिखेरी। कइयों ने तो परिजनों की इच्छा के विपरीत जाकर खेलों में अभ्यास जारी रखा और खुद को साबित भी किया। राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर ऐसी प्रतिभावान बेटियों से बातचीत की गई।
हांगकांग में खेल चुकी हैं सताक्षी
सिविल लाइन निवासी सताक्षी पाल 2017 में अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने 14 से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी किया है। व्यवसायी पिता की बेटी सताक्षी बताती हैं कि परिवार के लोग चाहते थे कि पढ़ाई में कुछ अच्छा करूं। लेकिन, जब 2017 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चयन हुआ तो सभी ने खूब सहयोग किया। अब परिवार के सभी लोगों को लगता है कि खेलों में भी भविष्य बनाया जा सकता है। वे 2011 से लगातार खेल रही हैं।
हाईस्कूल में हिना ने खेला था पहला राष्ट्रीय मैच
अब तक करीब 15 राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेल चुकीं राष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी हिना खातून बताती हैं कि परिवार के लोग चाहते थे कि अध्यापक बनूं। उनकी इच्छा के विपरीत उनका झुकाव खेल की ओर रहा। इसे जानने के बाद उन्होंने खेल में बढ़िया करने के लिए हमेशा सहयोग किया। वे बताती हैं खेलों में उन्हें सबसे पहले जीजीआईसी प्रधानाचार्य नीलम सिंह व गेम्स टीचर सुषमा ले कर आईं। बताती हैं कि टीचर उन्हें स्टेडियम में खेलने के लिए लाती थीं। धीरे-धीरे सब कुछ पटरी पर आने लगा और 2010 में हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा के समय पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने का मौका मिला। तब से यह प्रयास अनवरत जारी है।
परिवार के लोग चाहते थे पढ़ाई में अच्छा करूं
सुपेलवा न्यू कॉलोनी निवासी अंकिता शर्मा बताती हैं कि शुरूआत में परिवार के लोग खेल में जाने से मना करते थे। वे चाहते थे कि पढ़कर कुछ बनूं। हालांकि उन्होंने कभी इसका विरोध नहीं किया। हमने अभ्यास जारी रखा और धीरे-धीरे सब लोग सहयोग करने लगे। अब तक सात राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेल चुकी हूं। बताती हैं कि उनके पिता बिजनेसमैन हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना उनका सपना है।
किसान की बेटी ने हॉकी में लहराया परचम
सिविल लाइन्स निवासी हॉकी खिलाड़ी पूूजा भारती बताती हैं कि उनके पिता किसान हैं और खेल में भविष्य बनाने के उद्देश्य से वे मेरा खूब सहयोग करते हैं। 2017 में लखनऊ स्थित केडी सिंह बाबू खेल छात्रावास में चयन हो गया। इससे पहले स्टेडियम में अभ्यास करती थी। पूजा अब तक चार राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेल चुकी हैं। देश की टीम से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहुंच कर कुछ करने का उनका सपना है। इसके लिए वे लगातार प्रयासरत है।