उधार के रेडियोलॉजिस्ट सप्ताह में तीन दिन करती हैं अल्ट्रासाउंड
महिला अस्पताल में पचास फीसदी कम हैं चिकित्सक
बस्ती। जननी सुरक्षा सहित स्वास्थ्य विभाग की तमाम योजनाओं को संचालित करने वाले महिला अस्पताल के हाथ चिकित्सकों से खाली हैं। पैथोलॉजिस्ट का स्थानांतरण हो चुका है। मेडिकल कॉलेज की उधार की रेडियोलॉजिस्ट के सहारे अल्ट्रासाउंड संचालित हो रहा है। करीब 300 मरीजों की ओपीडी वाले इस अस्पताल में केवल दो स्थायी चिकित्सक हैं। चार संविदा चिकित्सकों के सहारे चिकित्सीय व्यवस्था संचालित हो रही है। अल्ट्रासाउंड के लिए मात्र तीन दिन ही अस्पताल में चिकित्सक आती हैं। शेष दिनों में मरीजों को बाहर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है।
महिला अस्पताल में प्रत्येक दिन 20 से 30 प्रसव होते हैं। यहां संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। पिछले दिनों यहां स्थायी रूप से तैनात सर्जन सहित तीन चिकित्सकों का स्थानांतरण हो गया। अब दो स्थायी चिकित्सक बचे हैं। तीन साल पहले रेडियोलॉजिस्ट के स्थानांतरण के बाद अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ताला लटक गया था। तमाम प्रयासों के बाद मेडिकल कॉलेज की रेडियोलॉजिस्ट को सप्ताह में तीन दिन के लिए यहां संबद्ध किया गया है। वह सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को यहां सेवा देती हैं। अस्पताल में हर महीने करीब 500 से 600 प्रसव भी होते हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी अब तक दूर नहीं हो पाई है। 13 पद के सापेक्ष संविदा सहित कुल सात चिकित्सक तैनात हैं। इनमें पैथोलॉजिस्ट का स्थानांतरण हो चुका है, मगर सीएमएस ने उन्हें रिलीव नहीं किया है।
अस्पताल में दिखाने आई मरीज की तीमारदार रचना ने कहा कि इमरजेंसी में आई थीं, मगर यहां कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है, इसलिए नर्सिंग होम जा रहे हैं। सीएमएस डॉ. सुषमा सिन्हा ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है, मगर जो हैं उनसे काम चलाया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजिस्ट की कमी पूरी नहीं हो पाई है, मगर सप्ताह में तीन दिन यहां अल्ट्रासाउंड संचालित होता है। यह सही है कि चिकित्सक नहीं है। इसके लिए शासन को लिखा गया है।