बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज बस्ती की चिकित्सा इकाई ओपेक चिकित्सालय कैली से लेकर अधिकांश सीएचसी और पीएचसी में कुत्तों की आवाजाही रोकने की व्यवस्था नहीं है।
सीएमओ को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि या तो चहारदीवारी बनी ही नहीं है या पुरानी व जर्जर होने से टूट चुकी है। इक्का-दुक्का अस्पताल ही ऐसे हैं, जहां कुत्तों और छुट्टा पशुओं की आवाजाही को रोका जा सकता है। सीएमओ डॉ. राजीव निगम का कहना है कि बजट आने के बाद अस्पतालों की चहारदीवारी कराई जाएगी।
टूटी चहारदीवारी की मरम्मत कराई जाएगी। अस्पतालों में छुट्टा पशुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की व्यवस्था कराई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में सार्वजनिक स्थानों पर छुट्टा पशुओं की आवाजाही पर रोक लगाने के संबंध में दिए गए आदेश के क्रम में सीएमओ कार्यालय से सभी सरकारी व निजी अस्पतालों से वहां की सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई थी।
हर अस्पताल में नोडल तैनाती के साथ ही वहां पर रैबीज की वैक्सीन की व्यवस्था कराई गई है। तीन अस्पतालों की ओर से सूचना दी गई है कि उनके यहां चहारदीवारी है ही नहीं, जबकि पांच ने रिपोर्ट की है कि उनके यहां की चहारदीवारी टूटी हुई है। दो अस्पतालों ने तो लिखा है कि उनके यहां की चहारदीवारी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नगरीय क्षेत्र में चलने वाले अस्पताल निजी भवन में संचालित हैं। पुरानी बस्ती क्षेत्र की शहरी पीएचसी नरहरिया और बरदहिया में चहारदीवारी नहीं है।