बस्ती। मौसम का मिजाज बुधवार को अचानक बदल गया। सुबह वातावरण घनी धुंध और बादलों की परत में ढका देखकर लोग हैरत में पड़ गए। दिसंबर जैसे मौसम का एहसास होने लगा।
जानकारों ने हवा की गुणवत्ता सूचकांक का आंकलन किया तो 165 दर्ज की गई, जो मध्यम से हानिकारक की सीमा पर है। जबकि एक दिन पहले मंगलवार को 143, सोमवार को 128 और रविवार को एक्यूआई 119 पर थी।
हवा में मौजूद नमी और धुएं का मिश्रण इतना घना हो चुका है कि कई इलाकों में सांस तक भारी महसूस होने लगी है। तेजी से तापमान गिरने से लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हुई है। अधिकतम तापमान 27 और अधिकतम 12 डिग्री सेल्सियस रहा।
कलवारी रोड के दुकानदार आनंद पांडेय बताते हैं कि सुबह इतनी धुंध थी कि सामने वाला मोबाइल टावर तक नहीं दिख रहा था। गाड़ी की हेडलाइट बिना कुछ साफ नहीं दिख रहा था। सुबह दफ्तर जाने वाली श्वेता मिश्रा ने कहा दो बार आंखें लाल हो गईं। लखनऊ जा रहे महुली के विनोद मिश्रा बताते हैं कि धुंध के कारण बस की रफ्तार काफी कम थी, करीब डेढ़ घंटे देर से लखनऊ पहुंची। कलवारी रोड, गांधी नगर, मालवीय रोड और सोनहा मोड़ पर सुबह दृश्यता 150-200 मीटर तक गिर गई। हल्की ठंडक के साथ हवा में चिकनाहट-सी महसूस हुई, जो स्मॉग की बढ़ती परत का संकेत है। कुछ ने आंखों में चुभन की शिकायत की, तो कई दोपहिया चालकों ने रास्ते में बार-बार रुककर चश्मा साफ किया।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र के अनुसार, हवा की गति सामान्य से आधी होने और नमी बढ़ने की वजह से प्रदूषक कण जमीन के पास चिपक गए हैं। यही कारण है कि धुंध और धुआं मिलकर स्मॉग की परत बना रहे हैं। सुबह की पहली रोशनी भी इस परत को चीर नहीं पा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अभी मौसम स्थिर है। अगर हवा की गति नहीं बढ़ी या हल्की बारिश नहीं हुई, तो एक्यूआई “अनहेल्दी” श्रेणी को पार कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों, बुजुर्गों और फेफड़ों के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है।
स्वास्थ्य पर असर, ओपीडी में 20-25 प्रतिशत बढ़े मरीज : जिले के मुख्य अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में गले में खराश, खांसी, आंखों में चुभन, सांस फूलना और एलर्जी जैसे मामलों में 20-25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि स्मॉग में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों के अंदर गहराई तक जाते हैं। सर्दी और प्रदूषण का यह मेल दमा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी को खतरनाक स्तर पर बढ़ाता है।