बस्ती। जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के चलते कई तरह की समस्याएं सामने आ रही है। कभी कभी तो कानून व्यवस्था पर भी बन आती है। दो दिन पूर्व नहाने की बारी में देर होने के नाते दो कैदियों की भिड़ंत में एक कैदी की मौत का मामला भी कमोवेश इसी से जुड़ा हुआ है। निसंदेह यह बस्ती जेल प्रशासन के लिए एक सबक है।
बता दें कि बस्ती जेल में 480 बंदियों को रखने की क्षमता है। जबकि वर्तमान में बंदियों की संख्या 1028 हैं। जाहिर है जहां 480 कैदियों के सुविधाओं का इंतजाम है वहां यदि दो गुने से अधिक संख्या की भीड़ हो जाय तो समस्याएं बढ़ेंगी ही। जेल में पानी की किल्लत नहीं है। लेकिन नहाने के लिए हो या पीने के लिए दोनों जगहों पर भीड़ तो बढ़ेगी ही। दो दिन पूर्व कैदी बैठोले और विष्णू के बीच नहाने की बारी के लिए जंग छिड़ गई जिसमें बैठोले को अपनी जान गंवानी पड़ी।
संतकबीरनगर जिले में अभी जेल नही है। यहां के बंदियों को भी बस्ती जेल में रखा जाता है। जेल में कैदियों की भीड़ बढ़ने की वजह यही है। और इसी के चलते जेल मैनुअल के मुताबिक बंदियों को अनुमन्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही है। हालाकि जेल प्रशासन द्वारा इसके लिए कई बार लिखा पढ़ी की गई है। लगातार अभाव में रह रहे बंदी कुंठा के शिकार हैं। मारपीट की घटनाओं की मुख्य वजह यही है। चौड़ी दीवार के पीछे हो रहे ऐसी घटनाओं की खबर तब बाहर आ पाती है, जब बैठोले जैसा कोई बंदी मौत की नींद सो गया होता है।
न्यायिक जांच होगी
मारपीट में घायल बंदी बैठोले की मृत्यु की न्यायिक जांच होगी। इसके लिए जेल प्रशासन ने पहल की है। जेलर ने बताया कि उनके स्तर से लिखा पढ़ी की जा रही है। 11 जून की शाम को बंदी स्नान कर रहे थे। बारी-बारी से वे नहाने का पानी भरते समय वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के निवासी हत्यारोपी विष्णु और कलवारी के बैठोले के बीच मारपीट हो गई। विष्णु ने बैठोले को उठाकर पटक दिया। ट्रामा सेंटर लखनऊ में मंगलवार रात उसकी मृत्यु हो गई।