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Basti News: दावे फेल...उपभोक्ता कतार में गुजार रहे दिन

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पटेल चौक पर गैस एजेंसी के बाहर लगी उपभोक्ताओं की लंबी लाइन। संवाद
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बस्ती। प्रशासन और एजेंसी संचालकों के दावे अगले दिन फेल नजर आए। रोजाना की तरह शनिवार को भी रसोई गैस एजेंसियों पर तड़के कतार लगनी शुरू हो गई। सुबह नौ बजे के बाद एजेंसियां खुली तो बाहर भीड़ एकत्र हो चुकी थी।
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टोकन काउंटर के सामने सिलिंडर के साथ लोग लाइन में व्यवस्थित होने लगे। 40- 50 लोगों के पीछे खड़े लोग खड़े हो गए, जब घंटे भर से अधिक समय बीता तो सिलिंडर पर ही बैठकर थकान उतारने लगे। सभी एजेंसियों पर एक जैसा दृश्य देखने को मिला।
शहरी क्षेत्र में पारदर्शी ढंग से रसोई गैस का वितरण सुनिश्चित कराने के लिए पांच दिन पहले ही पूर्ति निरीक्षकों की तैनाती की गई है। मगर एक भी एजेंसी पर पूर्ति निरीक्षक नजर नहीं आ रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए कंट्रोल रूम से कोई ठोस मदद भी नहीं मिल पा रही है। मालवीय रोड स्थित भारत गैस एजेंसी पर तीन सौ से अधिक उपभोक्ता सुबह नौ बजे से कतार में लग गए। यहां तीन बजे तक लाइन लगी रही। इस दौरान कई उपभोक्ताओं के पास पुराना पासबुक होने के कारण लौटा दिया गया।
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एजेंसी कर्मचारियों ने बताया कि फिर से आधार और बैंक पासबुक लाकर पहले केवाईसी करवाए। इसके बाद बुकिंग होगी तब सिलिंडर मिलेगा। उपभोक्ताओं ने बताया कि घंटों में लाइन में लगने के बाद सिर्फ यहां टोकन मिल रहा है। सिलिंडर लेने के लिए दस किमी दूर गोटवा जाना पड़ रहा है। वहीं रेलवे स्टेशन रोड स्थित भारत गैस एजेंसी, रौतापार स्थित भारत गैस एजेंसी और सिविल लाइन एजेंसी पर भी उपभोक्ताओं की लंबी कतार देखी गई।
उपभोक्ताओं ने बताया कि आज जिन्हें पर्ची मिली उन्हें सिलिंडर 17 मार्च को देने के लिए कहा गया है। यानी रसोई गैस के लिए दो दिन एजेंसी और गोदाम पर आकर लाइन लगाना पड़ रहा है। कंट्रोल रूम का नंबर मिलाने के बाद समस्या नोट करने में ही आधे घंटे समय लगा दिया जा रहा है। जवाब में यह तक नहीं बताया जा रहा है कि उसका निदान कब होगा। कंट्रोल रूम में केवल खानापूर्ति हो रही है। पटेल चौक स्थित इंडेन गैस सर्विस पर तो उपभोक्ताओं को टोकन के लिए नोकझोंक भी करना पड़ रहा है।
एक दिन पहले शुक्रवार को यहां एजेंसी संचालक और एक उपभोक्ता से मारपीट की नौबत सामने आ गई। बाद एजेंसी संचालक की ओर से उपभोक्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मालवीय रोड के रहने वाले दीपक शुक्ल बताते हैं कि गैस एजेंसियों पर पूरी तरह मनमानी की जा रही है। रसोई गैस खत्म होने से घर में भोजन के लाले पड़े हैं।
इस भीषण समस्या में केवाईसी न होने की बात कहकर उपभोक्ताओं को वापस लौटाया जा रहा है। जबकि कनेक्शन नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक सभी अपडेट हैं। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से बुकिंग भी हो रही है। यदि केवाईसी भी करवाना है तो यह आपदा से निपटने के बाद भी हो सकता है।
होम डिलीवरी व्यवस्था ध्वस्त : प्रशासन का दावा हैं कि रसोई गैस की बुकिंग के बाद होम डिलीवरी की सुविधा मिलेगी। मगर यह व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि लाइन लगाने के बाद नसीब वालों को ही सिलिंडर मिल पा रहा है। इस बदइंतजामी के बीच होम डिलीवरी का वादा तो एकदम झूठा है। पिकौरा दत्तूराय के सत्येंद्र कुमार बताते हैं कि पटेल चौक स्थित इंडेन गैस एजेंसी पर पहले तीन- चार दिन केवाईसी कराने के लिए दौड़ाया गया।
सभी प्रपत्र जमा करने पर नया कनेक्शन नंबर दिया गया। बुकिंग की प्रक्रिया पूरी हुए दस दिन बीत गए सिलिंडर अभी तक नहीं मिला है। कंट्रोल रूम में फोन किए तो सिर्फ समस्या के निदान का कोई समय नहीं बताया गया। डीएसओ के मोबाइल पर भी फोन किया गया लेकिन, उन्होंने रिसीव ही नहीं किया।
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